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कोहिनूर की अपशकुनी दास्तानः छिन गए राजपाट, अंत हुआ दर्दनाक।

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6:28 pm 1 Nov, 2015

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भाई साहब, हीरे का नाम है कोहिनूर। मतलब कि कीमत आंकने लगेंगे तो उत्तर प्रदेश और बिहार का साल भर का बजट निकल आएगा, लेकिन जहां जिसके हाथ लगा, इत्तेफाक कहिए या कुछ और, हालत पतली कर दी।

जी हां, कोहिनूर के बारे में कहा जाता है कि यह महा-अशुभ रत्न है और यह जिसके अधीन होता है, उसपर इसका प्रभाव अनिष्टकारी होता है।

पहले तो तमाम राजाओं और सल्तनतों को लगा था कि इसके शापित होने की बात महज वहम है। लेकिन धीरे-धीरे यह बात पुख्ता होती गई कि इस हीरे के साथ कुछ ना कुछ अपशकुन जरूर जुड़ा हुआ है।

तो बात ऐसी है कि यह हीरा कहां से आया, इसका भी कोई प्रमाण नहीं मिलता। कभी कहा जाता है कि इसे गोलकुन्डा की खदानों से निकाला गया था, जबकि कभी कहा जाता है कि यह महाभारत काल से भी पुराना है।

भारतीय साहित्य में इस हीरे का जिक्र करीब 5 हजार साल पहले महाभारत काल में बताया गया है।

मान्यताओं के मुताबिक, जामवन्त ने अपनी पुत्री जामवन्ती का हाथ श्री कृष्ण के हाथ में देते हुए उन्हें उपहारस्वरूप एक बहुत बड़ा हीरा दिया, जिसका नाम स्यमन्तक था। माना जाता है कि इसी हीरे का नाम बाद में कोहिनूर पड़ गया।

कोहिनूर के बारे में मान्यता है कि इसे धारण करने वाला विशाल राज्य, सुख प्राप्त करता है, लेकिन कभी खुश नहीं रह पाता।

है न अजीब बात? श्री कृष्ण के साथ भी ऐसा ही हुआ। महाभारत के दौरान कृष्ण को न सिर्फ अपने परिजनों के साथ युद्ध करना पड़ा, बल्कि उनका वध भी करना पड़ा। कालान्तर में कृष्म के साथ ही उनका वंश भी समाप्त हो गया। इस घटना के बाद कोहिनूर का जिक्र इतिहास में बहुत देर बाद मिलता है।

13वीं सदी तक यह हीरा मालवा के राजाओं के पास रहा था। लेकिन इसका नाम अब तक कोहिनूर नहीं रखा गया था।

1306 के बाद यह हीरा अलाउद्दीन खिलजी के पास था। खिलजी की मौत के बाद, इसे समरकंद ले जाया गया, जहां यह करीब 300 साल रहा और यहीं, इसके शापित होने का पता चला। यहां काकतीय वंश ने जब इस हीरे पर अधिकार जमाया तो तुगल शाह के साथ युद्ध में हार गया और उसके बाद वंश का खात्मा हो गया।


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13वीं सदी से लेकर 16 वीं सदी के बीच कोहिनूर अलग अलग मुस्लिम बादशाहों के पास रहा और आश्चर्य की बात ये है कि उन सबका अन्त बहुत बुरा हुआ।

शाहजहां ने यह हीरा अपने मयूर सिंहासन पर लगवाया।

इसके बाद से ही उनके बुरे दिन शुरू हो गए। शाहजहां की बेगम मुमताज की मौत हुई और शाहजहां के अपने बेटे औरंगज़ेब ने उन्हें कैद कर दिल्ली सल्तनत हथिया ली। शाहजहां के अंतिम दिन कैद में बहुत बुरे गुजरे।

कालान्तर में नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण कर एक तरह से मुगल साम्राज्य को खत्म कर दिया।

वह अपने साथ शाहजहां का मयूर सिंहासन लूट कर ईरान ले गया। वहां उसने इस हीरे का नाम दिया कोहिनूर। लेकिन दुर्भाग्य से नादिर शाह भी इस हीरे के अनिष्ट की जद में आ गया और 1747 में उसकी हत्या हो गई।

नादिर शाह से यह हीरा अफ़ग़ानिस्तान के अहमदशाह अब्दाली के हाथों में पहुंचा।

1830 में अफ़ग़ानिस्तान का तत्कालीन पदच्युत शासक शूजाशाह किसी तरह कोहिनूर के साथ बच निकला और पंजाब पहुंच गया। उसने वहां के महाराजा रणजीत सिंह को यह हीरा भेंट किया।

रणजीत सिंह इस हीरे का सुख भोग नहीं कर सके और उनकी मौत हो गई। उनका राज्य अंग्रेजों के अधीनस्थ हो गया। तब से लेकर अब तक यह हीरा ब्रिटेन में है।

जब अंग्रेजों को इस हीरे के शापित होने की जानकारी मिली तो आदेश दिया गया कि इसे सिर्फ महिलाएं ही ताज में धारण करें।

इस तरह इसके अनिष्ट को एक हद तक रोका जा सका। लेकिन माना जाता है कि इस हीरे की वजह से ही दुनिया से अंग्रेजी शासन का खात्मा हो गया।

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