पाकिस्तान के बिसरे जख्म कुरेदने जा रही है यह फिल्म, नाम है ‘द गाजी अटैक’

author image
Updated on 28 Jan, 2017 at 1:01 pm

Advertisement

17 फरवरी को हिंदी, तेलुगू और तमिल तीन भाषाओं में एक फिल्म रिलीज होने जा रही है। नाम है ‘द गाजी अटैक’। बताया जाता है कि यह फिल्म 1971 के युद्ध के दौरान भारत के पूर्वी समुद्र तट से दूर पाकिस्तान की पनडुब्बी पीएनएस गाजी के रहस्यमय तरीके से डूबने की कहानी है। यह बात तो तय है कि इस फिल्म को लेकर पाकिस्तान की काफ़ी किरकिरी होने वाली है। दरअसल, पाकिस्तान के इतिहास के पन्नों की एक दुखती रग है ‘ग़ाज़ी’, जिसे वह भूलना तो चाहता है, लेकिन ऐसा करना नामुमकिन है। ऐसे में यह फिल्म एक बार फिर पाकिस्तान के उसी जख्म को कुरेदने जा रही है।

आपको बता दें यह फिल्म तेलुगू डायरेक्टर संकल्प की पहली फिल्म है। इसका हिंदी संस्करण करण जौहर लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा इसका तमिल वर्जन भी तैयार है। इन तीनों को एक साथ 17 फरवरी को रिलीज किया जाएगा|

यह फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की गाजी नाम की एक पनडुब्बी के इर्द गिर्द घूमती हैं।

युद्ध के वक़्त ग़ाज़ी का इतना ख़ौफ़ था कि वॉर एंड डिफेंस एक्सपर्ट्स की राय है कि अगर गाजी पनडुब्बी कुछ दिन और बची रहती तो युद्ध के नतीजे पाक के हक में जा सकते थे। पाकिस्तान ने गाजी पनडुब्बी को अमेरिका से लीज पर लेकर अपने कुनबे में शामिल किया था।

बताया जाता है कि 1 दिसंबर 1944 को जब यूएस नेवी में इसे शामिल किया गया था, तब इसका नाम रखा गया था ‘डियब्ल’ओ। स्पेनिश में इसका अर्थ होता है डेविल यानी शैतान। इसे पाकिस्तान ने बाद में बदलकर गाजी कर दिया था। इसका शाब्दिक अर्थ होता है, धर्म-युद्ध का योद्धा। गाजी पनडुब्बी को ख़तरनाक तारीपीडो दागने और बारूदी सुरंगों का जाल फैलाने में महारत हासिल थी।

फाइल फोटो में पाकिस्तानी युद्धपोत पनडुब्बी पीएनएस ग़ाज़ी deccanchronicle

ऐसा कहते हैं कि इंडियन नेवी के लिए ग़ाज़ी खौफ का दूसरा नाम था। दरअसल, उस वक़्त भारतीय खेमे में कोई लड़ाकू पनडुब्बी नहीं थी। भारतीय नेवी अधिकारियों को खबर मिल चुकी थी कि गाजी मुंबई से करीब चार सौ किमी की दूरी पर श्रीलंका के रास्ते बंगाल की खाड़ी के पास पहुंच चुकी है। भारत के पास गाजी का कोई तोड़ नहीं था। एक ऐसा दुश्मन था गाजी के रूप में जो न दिखाई देता था और न ट्रेस होता था।


Advertisement

ऐसे में भारतीय नेवी ने गाजी से निपटने के लिए उसे कोड नाम दिया ‘काली देवी’। काली देवी ऑपरेशन के तहत नेवी अधिकारियों ने आईएनएस राजपूत के कमांडर को जिम्मेदारी सौंपी कि श्रीलंका से लेकर विशाखापत्तनम तक गाजी को ढूंढो और ध्वस्त कर दो। यह एक ऐसी हैरतअंगेज़ लड़ाई थी, जो पानी के उपर से पानी के नीचे एक विशालकाय दैत्य से लड़ी जानी थी।

ऐसे में यह फिल्म भारत के उन जांबांज़ कमांडर्स की जीत की कहानी है, जो अंडर वाटर व़ॉर के जरिए गाजी और उसपर सवार 92 पाकिस्तानी सैनिकों को डूबो दिया और भारतीय नौसेना की गौरवशाली गाथा लिखी।

देशभक्ति, बहादुरी और साहस से ओतप्रोत है ‘द गाजी अटैक’।

एक इतिहास यह भी जुड़ा है ग़ाज़ी पनडुब्बी से कि आजतक पाकिस्तान ने यह नहीं माना है कि उसकी पनडुब्बी को भारतीय नेवी ने मार गिराया है, लेकिन इतना ज़रूर कबूल किया है कि ग़ाज़ी पनडुब्बी रहस्मय तरीके से गायब हो गई। बताया जा रहा है कि यह फिल्म ग़ाज़ी अटैक पर लिखी एक किताब ‘ब्लू फिश’ पर आधारित है। यह फिल्म ओमपुरी की आखिरी दो-तीन फिल्मों में से भी मानी जा रही है। तापसी पन्नू, ओमपुरी और के. के. मेनन जैसे कई मंजे हुए कलाकारों ने अपने अभिनय से इतिहास के पन्नों को फिर से जीवित करने की कोशिश की है।

‘द गाज़ी अटैक’ को अंडरवॉटर वॉर पर बनी भारत की पहली फिल्म बताया जा रहा है।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement