पत्ते की कटोरी बनाने में थाईलैंड के शोधकर्ताओं ने लगा दिए एक साल, यहां हैं गली-गली मौजूद

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Updated on 3 Apr, 2016 at 10:09 am

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ऐसा दोना तो आपने भारत में हर कही देखा ही होगा।

यह एक तरह का देसी कटोरा होता है, जो सूखी पत्तियों से बना होता है। इसका उपयोग लगभग किसी भी प्रकार की खाने वाली वस्तुओं के लिए होता है। यहीं नहीं इसका इस्तेमाल दही, पानी-पुरी, चटनी जैसे तरल पदार्थों के लिए भी किया जाता है।

यह भारतीय जीवन का एक अभिन्न अंग है।

और तो और इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए यह भारत से नेपाल तक जा पहुंचा है। इसे नेपाली भाषा में ‘ड्यूना तापरी’ कहा जाता है। इतना ही नहीं यह सस्ता होने के साथ-साथ मानव और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद सुरक्षित है। इन पत्तों से सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिलता है।

जैसा की हम जानते हैं कि प्लास्टिक में गर्म खाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है। लेकिन यह दोना पूर्ण रूप से प्राकृतिक होते हैं, जिनको पत्ते की मदद से बनाया जाता है। प्लास्टिक के विपरीत जल्दी प्राकृतिक तौर पर नष्ट हो जाते हैं।


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हमें मालूम है कि दोने के निर्माण से लेकर उनसे मिलने वाले फायदे तक की जानकारी आपको भलीभांति पता होगी। फिर आप सोच रहे होंगे आज अचानक आपको दोने के बारे में क्यों बताया जा रहा है।



दरअसल बात ऐसी है कि यह दोना, जो भारत के गली गली में दिख जाता है, को बनाने में थाईलैंड के एक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक साल से भी अधिक समय खर्च कर दिए। है ना मज़ेदार बात?

दरअसल, वह प्लास्टिक के विकल्प की तलाश कर रहे हैं। लेकिन इसको बनाने के लिए एक साल का वक़्त! क्या यह हास्यपद नही है?

‘नारेसुअन विश्वविद्यालय’ द्वारा बनाए गए इन कटोरों में कुछ भी नया नहीं है। यह ठीक वैसे ही है, जो हमें अपने देश में सड़क के किनारे लगे ठेलों पर दिख जाते हैं।

इस लेख को लिखने से पहले मैं अपने प्रिय चाय वाले से इस शोध पर चर्चा कर रहा था। उसने थाईलैंड के इस शोध के बारे में तो ज़्यादा कुछ बात नहीं की, पर हां, थाईलैंड के लिए वीज़ा कैसे मिलेगा यह ज़रूर पूछ रहा था।

और इस कड़ी की सबसे मज़े की बात तो यह है, नारेसुअन विश्वविद्यालय ने इस दोने के पेटेंट के लिए आवेदन भी कर दिया है।


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