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नीतीश कुमार के लिए कठिन है आगे की राह, उठी तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग

Published on 21 August, 2016 at 6:07 pm By

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भागलपुर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के इस बयान के बाद कि अगले साल तक लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री होंगे, राजद-जद यू महागठबंधन में दरार साफ झलकने लगी है।

बुलो मंडल को लालू प्रसाद के परिवार का करीबी माना जाता है। उन्होंने यह बयान राजद प्रमुख लालू यादव से पटना में मिलने के बाद दिया।

यह पहली बार नहीं है, जब बुलो मंडल ने इस तरह का कोई बयान दिया है। इससे पहले पिछले सप्ताह ही मुजफ्फरपुर में उन्होंने तेजस्वी यादव को पदोन्नत देकर मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की थी।

संडे गार्डियन से बातचीत करते हुए बुलो मंडल ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। नीतीश कुमार ने लालू यादव का स्थान लिया था। अब तेजस्वी यादव नीतीश कुमार का स्थान लेंगे। मंडल ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात का बुरा नहीं मानना चाहिए। साथ ही मंडल ने दावा किया कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसका नतीजा जल्द ही देखने को मिलेगा।

बुलो मंडल का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब तेजस्वी यादव देश से बाहर हैं।



गार्डियन ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से बताया है कि लालू प्रसाद यादव ने अगले 30 अगस्त को पटना में पार्टी विधायकों, वर्तमान व पूर्व सांसदों की एक बैठक बुलाई है। इस बैठक का एजेन्डा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करना है।

माना जा रहा है कि अगर राष्ट्रीय जनता दल में तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर आम सहमति बन गई, तो नीतीश कुमार की सरकार खतरे में पड़ सकती है।


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243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल के 80, जनता दल युनाइटेड के 71, कांग्रेस के 27, सीपीआई-एमएल के 3 तथा निदर्लीय 4 विधायक हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर लालू प्रसाद यादव अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने की ठान लें तो उन्हें 122 विधायक जुटाने में मशक्कत नहीं करनी होगी। कांग्रेस, सीपीआई-एमएल व निर्दलीय विधायकों को मिलाकर 114 विधायकों का समर्थन आसानी से प्राप्त हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ उपेन्द्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी सरीखे राजग के नेता नीतीश कुमार की बजाए लालू प्रसाद यादव के अधिक नजदीक है। जरूरत पड़ी तो लालू भाजपा के विधायकों को तोड़ लेने में भला क्यों गूरेज करेंगे?

बिहार में शराब बंदी और फिर अवैध शराब की वजह से हुई मौतों के बाद नीतीश कुमार बैकफुट पर दिख रहे हैं। अधिकारियों के ट्रान्सफर के मसले पर भी नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव में छत्तीस का आंकड़ा दिख रहा है। कुल मिलाकर लालू प्रसाद यादव प्रशासन पर अब पूरा नियंत्रण चाहते हैं, जो तब तक नहीं संभव है, जब तक कि तेजस्वी को मुख्यमंत्री न बनाया जाए।


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अब देखना दिलचस्प होगा कि अगर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति बनती है तो नीतीश कुमार क्या करेंगे।

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