तेजस पर पत्थरबाजी साबित करता है कि हम भारतीय अच्छी चीजों के लायक नहीं हैं !

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Updated on 24 May, 2017 at 3:05 pm

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देश की पहली सेमी-बुलेट ट्रेन कहे जाने वाले तेजस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जा चुका है।

तेजस को देश की पहली सबसे तेज रफ्तार ट्रेन होने का गौरव प्राप्त हुआ है। साथ ही माना जा रहा है कि इस ट्रेन के पटरी पर उतरने से आने वाले दिनों में भारत में तेज रफ्तार ट्रेनों का रास्ता साफ होगा। इसके फीचर्स भी आधुनिक हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि तेजस ट्रेन अपनी रफ्तार या फीचर्स के लिए चर्चा का विषय नहीं बन रहा है, बल्कि चर्चा इस पर हमले को लेकर हो रही है।

तेजस एक्सप्रेस के रवाना होने से पहले ही इसमें तोड़फोड़ की खबर सामने आई है।

अब तक इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है तोड़फोड़ किसने की है। हालांकि, इस ट्रेन पर हमले की घटना के संज्ञान में आने के बाद लोग आश्चर्यचकित नहीं हैंं। भारत में ट्रेनों में तोड़फोड़, गंदगी फैलाना, बाथरूम के टैप चोरी कर लेने जैसी घटनाएं आम हैं।



पिछले साल भारतीय रेल ने देश की सबसे आधुनिक ट्रेन महामना एक्सप्रेस शुरू करने की घोषणा की थी।

प्रख्यात शिक्षाविद् और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय के नाम पर चलाई जाने वाली यह ट्रेन नई दिल्ली और वाराणसी के बीच दौड़ रही है।

हालांकि, इस ट्रेन की लॉन्चिंग के पहले ही दिन यात्रियों ने जो हालत की, उसे देखकर किसी को भी शर्म आ सकती है।

महामना एक्सप्रेस के शुरू होने के सिर्फ सात दिन के भीतर ही इसके टॉयलेट किट और कई वाटर टैप गायब मिले।

हाल में हुई ये दो घटनाएं साबित करती हैं कि किसी व्यवस्था के फेल होने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है। यह आम आदमी पर निर्भर करता है कि वह किसी व्यवस्था का कैसे इस्तेमाल करता है। ये घटनाएं यह भी साबित करती हैं कि एक नागरिक के रूप में हम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। अधिकार की लंबी-लंबी बातें करते हैं, लेकिन जब कर्तव्य निर्वहन की बात आती है तब हमें पता ही नहीं होता कि ‘कर्तव्य’ किस चिड़िया का नाम। कुल मिलाकर हम भारतीय अच्छी चीजों के लायक नहीं हैं।


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