लाखों शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार, जानिए क्या है मामला

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Updated on 22 Jul, 2017 at 1:49 pm

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देश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे ऐसे शिक्षक जिनके पास बीएड की डिग्री नहीं है, उनके लिए ये खबर खतरे की घंटी है।

केंद्र सरकार ने देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के करीब आठ लाख शिक्षकों को बीएड की योग्यता हासिल करने का आखिरी अवसर दिया है।

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सरकार ने कहा है कि 31 मार्च 2019 तक जिन शिक्षकों के पास बीएड की डिग्री नहीं होगी, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इससे जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (संशोधन) बिल, 2017 लोकसभा में पारित कर दिया गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने लोकसभा में विधेयक को पेश करते हुए कहा कि इस समय  प्राइवेट स्कूलों में करीब साढ़े पांच लाख और सरकारी स्कूलों में ढाई लाख शिक्षकों के पास  न्यूनतम योग्यता भी नहीं है। ऐसे में इन अध्यापकों का पढ़ाना, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।



ऐसे में 2019 तक सभी कार्यरत शिक्षकों को अनिवार्य न्यूनतम योग्यता हासिल करनी होगी, वरना उनकी नौकरी चली जाएगी।

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जावड़ेकर ने आगे जानकारी दी कि ऐसे शिक्षकों की सहायता के लिए सरकार ने हाल ही में ‘स्वयं’ पोर्टल लॉन्च किया है, जिसमें पाठ्य सामग्री, ट्यूटोरियल एवं अन्य पढ़ाई से संबंधित सामग्री उपलब्ध है।


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