डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 10 अनमोल बातें जो शिक्षकों को आत्मसात करना चाहिए

Updated on 5 Sep, 2017 at 11:30 am

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माता-पिता के बाद किसी भी बच्चे के जीवन में एक शिक्षक बहुत महत्व होता है। शिक्षक ही वह इंसान होता है जो अपने छात्र का सही मार्गदर्शन करते हुए उसे जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज एक ऐसे ही महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। इस दिन को देशभर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक होने के साथ ही डॉ. राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। 40 सालों तक शिक्षक के रूप में काम करने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जीवनकाल में कई ऐसी बातें कहीं जो आज के दौर में हर शिक्षक को जानना और समझना चाहिए।

  1. शिक्षक का काम सिर्फ विद्यार्थियों को पढ़ाना ही नहीं है, बल्कि उनका बौद्धिक विकास भी करना है।
  2. शिक्षा मानव और समाज का सबसे बड़ा आधार है।
  3. अच्छा शिक्षक वह है, जो ताउम्र सीखता रहता है और अपने छात्रों से सीखने में भी उसे कोई परहेज न हो।
  4. उच्च नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में उताकर उसे आत्मसात करे।
  5. शिक्षक समाज का निर्माता होता है। समाज के निर्माण में उसकी अहम भूमिका होती है।
  6. कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती है, जब तक उसे पाने वाले लोगों को विचारों को व्यक्त करने की आजादी न दी जाए।
  7. शिक्षक वह नहीं, जो तथ्यों को छात्रों के दिमाग में जबरन डालने का प्रयास करे। सही मायने में शिक्षक वही है, जो उसे आने वाली चुनौतियों के लिये तैयार करे।
  8. पुस्तकें वह माध्यम हैं, जिनके जरिये विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण किया जा सकता है।
  9. ज्ञान के माध्यम से हमें शक्ति मिलती है, प्रेम के जरिये हमें पूर्णता मिलती है।
  10. हमें तकनीकी ज्ञान के अलावा आत्मा की महानता को प्राप्त करना भी जरूरी है।

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डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपना जीवन भारत के विकास में लगा दिया। उन्होंने भारत की आजादी के बाद यूनिस्को में देश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1949 से लेकर 1952 तक वह सोवियत संघ में भारत के राजदूत बनकर रहे। वर्ष 1952 में डॉ. राधाकृष्णन को देश का पहला उपराष्ट्रपति बनाया गया। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। बाद में वर्ष 1962 में डॉ. राधाकृष्णन को देश का दूसरा राष्ट्रपति चुना गया।

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