चाय के साथ-साथ साहित्य का पान कराते हैं चाय वाले साहित्यकार लक्ष्मण राव

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3:09 pm 10 Feb, 2016

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कबीर दास ने बहुत पहले कहा था कि ”जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान…” इस दोहे को अगर सही मायने में कोई चरितार्थ करता है तो वो हैं हिन्दी भवन के सामने चाय की छोटी सी दुकान लगाने वाले लक्ष्मण राव।

लक्ष्मण राव पेशे से एक चाय विक्रेता हैं, लेकिन अगर इनके काम से इनकी शख्सियत का निर्णय करेंगे तो धोखा खा जाएंगे। गौर करें तो पता चलता है कि वह चाय के साथ-साथ लोगों को साहित्य का पान भी कराते हैं।

लक्ष्मण राव एक साहित्यकार हैं। ये हिन्दी भाषा में 24 किताबें लिख चुके हैं जिनमें से 13 छप चुकी हैं। उनकी पहली किताब ‘रामदास’ की लगभग 20 हजार प्रतियां बिक चुकी हैं। यही नहीं इनकी किताबें अमेजन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील जैसी ऑनलाइन वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।

लक्ष्मण बताते हैं कि इन ऑनलाइन वेबसाइट्स ने पहले उनकी किताबें लेने से मना कर दिया था लेकिन लोगों की जबरदस्त मांग ने इन वेबसाइट्स को उनकी किताबें रखने के लिए मजबूर कर दिया।

हिन्दी भवन की ऊंची इमारत में जहां हिन्दी को विश्व में फैलाने के लिए तरह-तरह के असफल प्रयास किए जाते हैं, उसी के सामने इस चाय वाले की जमीन पर पड़ी किताबों को देश-दुनिया से लोग खरीदने के लिए आते हैं।

लक्ष्मण से मिलने स्विटजरलैण्ड से दिल्ली आई एक महिला पर्यटक ने इनकी 4 किताबें खरीदी। यह पूछे जाने पर कि वह हिन्दी में लिखी इन किताबों को कैसे समझेंगी तो उन्होंने बताया कि वह संस्कृत सीख रही हैं और इस किताब को समझने के लिए वह अपने हिन्दी सीखने वाले दोस्तों की मदद लेंगी।


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लक्ष्मण के मुताबिक एक बेहतर इंसान ही एक बेहतर साहित्यकार हो सकता है। आईटीओ के महज चंद कदमों पर स्थित हिन्दी भवन के सामने जमीन पर बैठे राष्ट्रपति सम्मानित इस चाय वाले साहित्यकार से मिलने देश-विदेश के तमाम लोग रोज आते हैं। तो आप जब भी आईटीओ जाएं लक्ष्मण जी के यहां चाय जरूर पिएं, यकीनन वो दिन आपकी जिंदगी का एक यादगार दिन होगा।

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