अब नहीं बच सकेंगे काले धन को ठिकाने लगाने वाले, सरकार करने जा रही है ‘बिग डेटा’ का इस्तेमाल

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Updated on 7 Dec, 2016 at 2:37 pm

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अब सरकार उन लोगों पर डंडा चलाने की तैयारी में है, जिन्होंने अपने काले धन को किसी न किसी तरह से ठिकाने लगाया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट काले धन छिपाने वालों को बाहर निकालने के लिए बिग डेटा का इस्तेमाल करने जा रहा है।

बिग डाटा एक ऐनालिटिक्स टूल है जो कुल इनकम टैक्स डेटा चेक करके किसी भी तरह की गड़बड़ी, हेरा-फेरी के बारे में जानकारी देगा। जानकारी प्राप्त होने बाद आयकर विभाग 31 दिसंबर के बाद लोगों को नोटिस भेजेगा।

इस टूल के इस्तेमाल के जरिए टैक्स डिपार्टमेंट, कॉर्पोरेट टैक्स और पर्सनल टैक्स के डेटा जुटाकर उनका मिलान करेगा।

सरकार ने इसी साल मई में टैक्स भुगतान बेहतर बनाने की दिशा में कॉर्पोरेट टैक्स रिपोर्टिंग के कुछ मामलों में टैक्स ऐनालिटिक्स टूल का इस्तेमाल करना शुरू किया था। यह पहली बार होगा जब इस टूल को पर्सनल टैक्स के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा।

डाटा ऐनालिटिक्स टूल के उपयोग में लाये जाने पर, इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र कहते हैंः



“ऐनालि‌टिक्स टूल से सिर्फ यही पता नहीं चलेगा कि किसी व्यक्ति ने बैंकों में कितना पैसा जमा कराया है। इससे यह भी जानकारी मिलेगी कि उसने पहले के वर्षों में कितना इनकम टैक्स चुकाया था। यह भी पता चलेगा कि उसकी कंपनी ने कितना कॉर्पोरेट टैक्स चुकाया था और क्या उसका कोई एंप्लॉयी है और क्या उन्होंने हाल में बैंक में पैसा जमा किया है। आप व्यवहारिक तौर पर किसी व्यक्ति की टैक्स हिस्ट्री का हर डिटेल पता कर सकते हैं।”

ऐसा कहा जा रहा है कि काले धन को सामने लाने की सरकार की इस कवायद में संदिग्ध बैंक डिपॉजिट को ही निशाने पर लिया जाएगा।

नवम्बर में आयकर अधिनियम की धारा 115BBE में संशोधन वाला विधेयक पास हुआ था, जिसके तहत कैश डिपाजिट, अघोषित आय या निवेश पर 60 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। ऐसे में जानकारों का मानना है कि आयकर विभाग 1 अप्रैल 2016 के बाद से अपने खातों में पैसा जमा कराने वाले लोगों को पूछताछ के दायरे में ला सकती है।


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