क्या ताजमहल को शिफ्ट किया जा सकता है? जानिए ये कैसे होगा

Updated on 16 May, 2018 at 6:23 pm

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ताजमहल आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए पहचान बन चुका है। यह देशी-विदेशी पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है। लाखों सैलानी हर साल इसे देखने आते हैं और यादगार के तौर पर तस्वीरों को संजोए रखते हैं। बीते दिनों ताजमहल को शिफ्ट करने के लिए चर्चा शुरू हुई थी। सुनने में अटपटा लगता है, लेकिन हम यहां आपको ये बताने जा रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो यह आखिर कैसे संभव हो सकेगा।

 

दरअसल, मदिरों या इमारतों को नई जगह पर शिफ्ट करने का चलन दुनिया भर में देखा जा रहा है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन मुख्य वजह है, आने वाली पीढ़ियों के लिए इमारतों को संरक्षित करना, ताकि वे अपने इतिहास को जान सकें, खुद को पहचान सकें। हालांकि, ताजमहल को आगरा से अलग करके देखना अजीब लगता है।

 

 

मिस्र में ऐसा कारनामा कई साल पहले किया गया।

 

वहां लगभग तीन हजार साल पुरानी और ऐतिहासिक इमारत को उठाकर दूसरी जगह पर रख दिया गया। हालांकि, उसे इस काम में यूनेस्को की भरपूर मदद मिली। मिस्र के अबु सिम्बल मंदिर के साथ ऐसा प्रयोग किया गया। अबु मंदिर के पास नील नदी पर बांध बनने से उसे डूबने का भय था, जिसके कारण मंदिर को शिफ्ट कर दिया गया।


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ब्रिटिश जियोग्राफिक एक्स्पेडीशन कंपनी की डायरेक्टर किम कीटिंग का कहना हैः

“अपनी ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के लिए मिस्र बहुत ही प्रयासरत रहा है। अबु सिम्बल मंदिर को हम मिसाल के रूप में देख सकते हैं। मंदिर को सैकड़ों टुकड़े कर विस्थापित किया गया।”

 

आर्केलॉजिकल डिपार्टमेंट के एक अधिकारी की मानें तो भारत में भी ऐसा संभव है। आंध्र प्रदेश और राजस्थान में मंदिरों को पहले भी शिफ्ट किया जा चुका है। हालांकि, ताजमहल के विषय में वह कुछ भी बताने से बचते रहे। वैसे इस बड़े काम के लिए यूनेस्को की मदद ली जा सकती है। फिलवक्त यूनेस्को भी अन्य दूसरे ऐसे प्रोजेक्ट्स पर लगा हुआ है।

 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट रखरखाव एजेंसी को पहले भी फटकार लगा चुकी है और उदासीन रवैये को ठीक करने को कहा है। ताजमहल शिफ्ट हो ऐसा कौन चाहेगा लेकिन अगर ऐसा होता है तो मुमकिन है!

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