आज भी 2007 टी-20 वर्ल्ड कप के ये खास लम्हें रोंगटे खड़े कर देते हैं, धोनी की सेना ने कर दिखाया था कमाल

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Updated on 24 Sep, 2018 at 5:08 pm

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24 सितंबर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बेहद खास है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2007 में आज ही के दिन भारत ने वर्ल्ड टी-20 के फाइनल में पाकिस्तान को हराकर टी-20 वर्ल्ड कप का पहला खिताब अपने नाम किया था। धोनी की कप्तानी में खेले गए इस विश्व कप में भारत अंडरडॉग टीम थी। किसी को भारत के फाइनल जीतने की उम्मीद तो छोड़िए, क्वार्टर फाइनल में पहुंचने तक की उम्मीद नहीं थी। इसका कारण साल 2007 में ही क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम की मिली हार थी। साल 2007 क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम को पहले ही दौर में श्रीलंका और कमजोर मानी जा रही बांग्लादेश के हाथों हारकर बाहर का रास्ता देखना पड़ा था।

लेकिन टीम इंडिया ने उसी साल टी-20 टूर्नामेंट में जो हुंकार भरी, वो विश्व क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई। इस टूर्नामेंट से जुड़ी कई ऐसी यादें हैं जो आज भी रोंगटे खड़ा कर देती हैं। बात अगर फाइनल मुकाबले की करें तो इस रोमांचक मुकाबले को भला कोई क्रिकेट प्रेमी कैसे भूल सकता है। जब दांतों तले उंगली दबाएं फैंस स्टेडियम में और टीवी सेटों के आगे टकटकी लगाकर बैठे हुए थे। आज उसी टूर्नामेंट के खास लम्हें हम आपके लिए लेकर आए हैं।

 

बॉल आउट में भारत-पाक का आमना-सामना

किसी ने नहीं सोचा था कि दोनों देशों के बीच वर्ल्ड टी-20 का पहला मैच टाई रहेगा। दोनों टीमों ने तब 141-141 रन बनाए थे। इसके बाद नियम अनुसार विजेता टीम का फैसला करने के लिए बॉल आउट हुआ। बॉल आउट में भारत की ओर से वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा ने गिल्लियां बिखेरीं। जबकि, पाकिस्तान के तीनों गेंदबाज उमर गुल, यासिर अराफात और शाहिद आफरीदी ऐसा करने से चूक गए।

युवराज सिंह के दनादन छक्के

2007 वर्ल्ड कप का ज़िक्र हो रहा हो और छह छक्कों की बात न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी यूएसपी युवराज सिंह द्वारा इंग्लैंड के गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को लगाये गए 6 गेंदों में 6 छक्के रहे। युवराज सिंह ने सिर्फ 16 गेंदों में आतिशी पारी खेलते हुए 58 रन जड़ दिए थे।

फाइनल के हाईवोल्टेज मुकाबले में गौतम गंभीर ने खेली 75 रनों की विनिंग पारी

मैच में टॉस भारत ने जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। गौतम गंभीर ने 54 गेंदों पर 75 रन बनाए और टीम इंडिया ने पांच विकेट के नुकसान पर 20 ओवरों में 157 रन बनाए।

फाइनल मुकाबले में इरफ़ान पठान का शानदार स्पेल


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इरफान पठान ने इस मैच में 16 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। वहीं आरपी सिंह ने मोहम्मद हाफिज और कमरान अकमल को आउट कर पाकिस्तान को शुरुआती झटके दिए।

जोगिंदर शर्मा को आखिरी ओवर में थमाई गेंद

सारा दारोमदार आखिरी ओवर पर था और भारतीय कप्तान धोनी ने गेंद हरियाणा के हरफनमौला खिलाड़ी जोगिंदर शर्मा को दे दी। सभी के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था। ओवर की दूसरी गेंद पर मिस्बाह उल हक ने छक्का जड़ा। पाकिस्तान को अब 4 गेंदों पर 6 रनों की जरूरत थी। मैच भारत के हाथों से जाता दिख रहा था।

मिस्बाह से हुई चूक और श्रीसंत ने लपक लिया कच

जोगिन्दर शर्मा के हाथों में गेंद थी। लग रहा था कहीं धोनी ने जोगिंदर को गेंद देकर कोई गलती तो नहीं कर दी, लेकिन धोनी का ये दाव सटीक निशाने पर जाकर लगा। मिस्बाह ने विकेट के पीछे हवा में एक शॉट खेला लेकिन गेंद ज्यादा उठ गई। वहां शॉर्ट फाइन लेग पर खड़े एस श्रीसंत ने कैच लिया और इसी के साथ भारत ने वर्ल्ड कप पर कब्जा जमा लिया।

 

धोनी के करियर की यह सबसे बड़ी जीत में से एक है। यही वह मैच भी था जहां से धोनी की कप्तानी को एक अलग नजरिए से देखा जाने लगा। वहीं इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम की जीत ने टीम इंडिया को एक नई दिशा दी।

 

 

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