अस्पताल ही नहीं, पूरे सिस्टम को ऑक्सीजन की जरूरत है

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Updated on 13 Aug, 2017 at 2:34 pm

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत का आंकड़ा बढ़कर 63 हो गया है। आज सुबह 11 साल के बच्चे ने दम तोड़ दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये मौतें ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इससे इन्कार किया है।


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बताया गया है कि ऑक्सीजन की आपूर्तिकर्ता कंपनी ने पेमेन्ट न होने की वजह से सप्लाई बंद कर दी थी। जिस तरह छनकर बाते सामने आ रही हैं, उससे पता चलता है कि अॉक्सीजन की कमी अचानक नहीं हो गई। लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली फर्म का करीब 60 लाख रुपए बकाया हो गया था। इस संबंध में फर्म के अधिकारियों ने महानिदेशक चिकित्सा- शिक्षा व डीएम को भी पत्र लिखा था। अंततः पिछले गुरुवार की रात को ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गयी।

31 जुलाई को मीडिया में इस बावत खबरें तैरने लगीं थीं कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने बड़ा संकट आने वाला है।

अब सवाल उठता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे हुए अधिकारी क्या कर रहे थे? महानिदेशक चिकित्सा- शिक्षा व डीएम का क्या रोल था?

इस रिपोर्ट में ऑक्सीजन की सप्लायर कंपनी पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा के हवाले से बताया गया हैः

“अस्पताल प्रबंधन से पहले ही बकाये का राशि का भुगतान करने और 10 लाख से ज्यादा की राशि बकाया होने पर ऑक्सीजन सप्लाई रोकने की बात बता दी थी। इस बात का उल्लेख एग्रीमेंट में भी है।”

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल अप्रैल में भी कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई रोकी थी लेकिन तब ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ था और समय रहते मामले को सुलझा लिया गया था।

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चों की मौत की जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, वहां किसी तरह की अनोहनी की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है।


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