स्कूल ड्रॉपआउट बुजुर्ग ने बना दी सोलर कार; किया हजारों किलोमीटर का सफर

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Updated on 10 Dec, 2015 at 1:09 pm

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अगर कुछ बड़ा करना हो तो उम्र आड़े नहीं आती। इस कहावत को सच कर दिखाया है 63 साल के सैय्यद सज्जन अहमद ने। बेंगलूरू से करीब 70 किलोमीटर दूर कोलार में रहने वाले सैय्यद ने एक सोलर कार बनाई है और अब तक हजारों किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं।

और तो और वह दिल्ली में आयोजित होने वाले पहले इन्डिया इन्टरनेशनल साइन्स फेयर में हिस्सा लेने के लिए बेंगलूरू से अपनी कार चलाते हुए यहां तक पहुंचे थे। उन्हें 3 हजार किलोमीटर की दूरी का सफर तय करने में 30 दिन का समय लगा।

गरीबी और तंगहाली की वजह से स्कूल की अपनी पढ़ाई पूरी नहीं करने वाले सैय्यद इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स एसेम्बल करने का काम करते हैं। पहले वह टेप, रेडियो, टीवी आदि ठीक करने का काम करते थे।

लगातार काम करते हुए उन्हें लगा कि उन्हें कुछ नया करना चाहिए। कुछ ऐसा जिससे समाज को एक नई दिशा मिल सके। और इसकी शुरुआत हुई, वर्ष 2002 में। तब वह 50 वर्ष आयु के थे।


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सैय्यद ने एक सोलर कार बनाने की ठानी, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना अपना काम कर सके। पहले उन्होंने एक दोपहिया गाड़ी को मॉडीफाई कर इसे इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील कर दिया। बाद में तीन पहिया और फिर चार पहिया कार। सैय्यद को अपने काम की वजह से कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। उन्हें विज्ञान और पर्यावरण के क्षेत्र में कर्णाटक सरकार द्वारा वर्ष 2006 में एक अवार्ड दिया गया।

दिल्ली आईआईटी के प्रांगण में 4 से 8 दिसम्बर तक चलने वाले इस साइन्स फेयर में अहमद ने अपनी कार का प्रदर्शन किया, जिसमें पांच सोलर पैनल लगे हुए हैं। प्रत्येक पैनल की क्षमता है 100 वाट। इन पैनल से मिलने वाली उर्जा से संचालित होते हैं 12 वोल्ट के 6 बैटरी के सेट, जिनसे कार को मिलती है रफ्तार।

अहमद का दावा है कि वह अब तक पूरे देश भर में एक लाख किलोमीटर से अधिक का सफर अपनी कार में तय कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जिन्दगी से प्रेरणा लेने वाले सैय्यद कहते हैं कि उनके इस वाहन की कीमत करीब 1 लाख रुपए है।

वह एक बार फिर सफर पर निकलने वाले हैं। इस बार दिल्ली से रामेश्वरम। डॉ. कलाम की जन्मस्थली तक।

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