आलमगीरः औरंगजेब को यह खूनी तलवार शाहजहां ने उपहार में दी थी

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Updated on 10 Jun, 2017 at 11:10 pm

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वर्ष 1658…। जून के महीने के शुरुआती दिन थे। बड़े भाई दारा शिकोह पर जीत हासिल करने के बाद औरंगजेब जब दिल्ली पहुंचा, तब उसे पिता मुगल सम्राट शाहजहां ने एक तलवार भेंट की थी, जिसका नाम था ‘आलमगीर’ यानि विश्व विजेता। बाद में औरंगजेब को भी क्रमशः ‘आलमगीर’ के नाम से जाना गया।

आलमगीर तलवार

इन पंक्तियों को पढ़कर आपको लग रहा होगा कि शाहजहां ने जो कुछ भी किया वह एक गौरवान्वित पिता के रूप में जायज था। लेकिन यह सच से बेहद परे है। सच तो यह है कि शाहजहां अपनी बीमारी की वजह से बेहद कमजोर हो चला था। वहीं, दारा शिकोह, शाह सुजा और औरंगज़ेब में सत्ता संघर्ष की वजह से वह बेहद दुःखी भी था। शाहजहां की दिली ख्वाहिश थी कि मुगलिया तख्त पर दारा शिकोह बैठे, लेकिन औरंगजेब को यह मंजूर नहीं था। उसने दारा शिकोह को शिकस्त दी और 31 जुलाई 1658 को खुद को मुगल बादशाह घोषित कर दिया। औरंगजेब ने खुद को आलमगीर की उपाधि दी, जो उसके तलवार का नाम था।

बादशाह बनने के बाद औरंगजेब ने दारा शिकोह को 1659 में फांसी पर लटकवा दिया। धार्मिक रूप से कट्टर और महात्वाकांक्षी औरंगजेब यहीं नहीं रुका। उसने दारा शिकोह के दो बेटों को ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया। दारा के बड़े बेटे सुलेमान को तब तक अफीम पिलाई गई, जब तक कि उसके प्राण नहीं निकल गए। वहीं, छोटा बेटा सिफिर मृत्यु तक तक बंदी बनाकर रखा गया। दारा की दो पत्नियों को औरंगजेब ने उससे निकाह करने का आदेश दिया। पहली पत्नी उदेपुरी ने इसे मान लिया, लेकिन दूसरी पत्नी रनदिल ने यह आदेश मानने से इन्कार करते हुए अपने चेहरे पर चाकुओं से वार कर बिगाड़ लिया। इसी क्रम में औरंगजेब ने पिता शाहजहां को बंदी बना लिया। शाहजहां को आगरा के किले में बंदी बना कर रखा गया था। यहां 22 जनवरी 1666 को 64 वर्ष की आयु में शाहजहां का देहान्त हो गया।


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औरंगजेब एक कट्टर मुसलमान था। उसने पूरे साम्राज्य पर फतवा-ए-आलमगीरी (शरियत या इस्लामी कानून पर आधारित) लागू किया और हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया। हिन्दू जनता पर शरियत लागू करने वाला वह पहला मुसलमान शासक था। उसने अनेक मंदिरों को नष्ट किया और वहां मस्जिदें बनवाई। कश्मीरी हिन्दुओं को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया। कश्मीरी हिन्दुओं ने सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर से मदद मांगी। तेगबहादुर ने इसका विरोध किया तो औरंगज़ेब ने उनकी हत्या करवा दी। इसके अलावा औरंगजेब ने भारत में इस्लामी शासन की स्थापना के लिए हजारों हिन्दुओं को मरवा डाला।

जहां तक तलवार की बात है तो इतिहासकारों का मानना है कि औरंगजेब के पास आलमगीर के अलावा 27 व्यक्तिगत तलवारें थीं। इन तलवारों के नाम अलग-अलग थे। इनमें एक तलवार का नाम था ‘काफिरों का हत्यारा’। ये तलवार सोने की नक्काशी से सुसज्जित रहे थे। साथ ही इनमें कीमती पत्थर भी जड़े होते थे।

जहां तक इस्लाम में तलवार के नाम रखने का चलन है तो इसका दृष्टांत सबसे पहले 7वीं सदी में मिलता है। पैगंबर मोहम्मद के दामाद अली के पास जुल्फीकार नामक प्रसिद्ध तलवार थी।

प्रसिद्ध तलवार जुल्फीकार। wikipedia

औरंगजेब के पास विदेशी तलवारों की संख्या अधिक थी। ये तलवार यूरोप से मंगाए जाते थे। इन तलवारों को फिरंगी कहा जाता था। यही नहीं, औरंगजेब अपने जमाने में युद्ध में इस्तेमाल किया जाने वाला गोला-बारूद भी यूरोप से मंगाता था, क्योंकि वे उन्नत कोटि के होते थे।

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