इस हाल में रहता है एशियाई खेलों में गोल्ड जीतने वाली स्वप्ना का परिवार, नहीं थम रहे मां के खुशी के आंसू

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Updated on 30 Aug, 2018 at 7:12 pm

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जो लोग सुख-सुविधाओं के अभाव में सफल न होने का रोना रोते हैं, उनके लिए इस लड़की का परिश्रम मिसाल है। भारत की स्वप्ना बर्मन ने बुधवार को महिलाओं की हेप्टाथलन स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में मेडल जीतने वाली पहली महिला भारतीय खिलाड़ी बनीं। अपनी इस जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल के बेहद गरीब परिवार से आने वालीं 21 वर्षीया देश की इस युवा खिलाड़ी ने दिखा दिया कि अगर प्रतिभा और हौसले बुलंद हो तो कोई भी मुश्किल आपका रास्ता नहीं रोक सकती।

 

एशियाई खेलों में जैसे ही स्वप्ना बर्मन के स्वर्ण पदक जीतने की खबर आई, उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी शहर में स्थित उनका परिवार खुशी से झूम उठा। घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

 

जानिए क्या होता है हेप्टाथलन

हेप्टाथलन खेल की सात स्टेज होती हैं, जिसमें खिलाड़ी सात अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेते हैं। पहले स्टेज में 100 मीटर फर्राटा रेस होती है। दूसरा हाई जंप, तीसरा शॉट पुट, चौथा 200 मीटर रेस, 5वां लॉन्ग जंप और छठा जेवलिन थ्रो होता है। इस इवेंट के सबसे आखिरी चरण में 800 मीटर की रेस होती है। इन सभी खेलों में खिलाड़ी को प्रदर्शन के आधार पर पॉइंट मिलते हैं। फिर सभी पॉइंट्स को जोड़कर पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के ऐथलीट का फैसला किया जाता है।

 

स्वप्ना ने इन 7 स्पर्धाओं में कुल 6026 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

 

इन 7 स्पर्धाओं में स्वप्ना को मिले इतने अंक:

 

स्वप्ना ने 100 मीटर में हीट-2 में 981 अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया।

 

 

हाई जंप में 1003 अंकों के साथ पहले स्थान पर कब्जा जमाया। शॉट पुट में वह 707 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।

 

 

200 मीटर रेस में उन्होंने हीट-2 में 790 अंक के साथ सातवां स्थान हासिल किया और लंबी कूद में 865 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।

 

सात स्पर्धाओं में से अन्तिम स्पर्धा 800 मीटर में उतरने से पहले बर्मन ने चीन की क्विंगलिंग वांग पर 64 अंक की बढ़त बना रखी थी। उन्हें इस आखिरी स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत थी और वह इसमें चौथे स्थान पर रहीं।

 

 

एक रिक्शाचालक की बेटी का एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतना किसी सपने से कम नहीं। जैसे की स्वप्ना की जीत पर मुहर लगी तो एथलीट के घर के बाहर लोगों का जमावड़ा लग गया और चारों तरफ मिठाइयां बांटी जाने लगीं।


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स्वप्ना की इस सफलता से उनकी मां बाशोना इतनी भावुक हो गईं कि उनके मुंह से शब्द नहीं निकल पा रहे थे।

 

 

वो बेटी की जीत की कामना के लिए भगवान से पूरे दिन प्रार्थना करने में लगीं थीं। अपनी बेटी की जीत की दुआओं में लगी स्वप्ना की मां ने खुद को काली माता के मंदिर में बंद कर लिया था और जब उसके जीत कि खबर मिली उनके आंसू खुशी के मारे थमे नहीं।

 

बेटी के पदक जीतने के बाद स्वप्ना की मां बशोना ने कहाः

 

“मैंने उसका प्रदर्शन नहीं देखा। मैं दिन के दो बजे से प्रार्थना कर रही थी। यह मंदिर उसने बनाया है। मैं काली मां को बहुत मानती हूं। मुझे जब उसके जीतने की खबर मिली तो मैं अपने आंसू रोक नहीं पाई।”

 

घर की माली हालत की बात करें तो स्वप्ना के पिता पंचन बर्मन रिक्शा चलाते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत ठीक नहीं है और वह बिस्तर पर हैं।

 

Swapna Barman parents (स्वप्ना बर्मन के माता पिता)

स्वप्ना बर्मन के माता पिता india

 

एक समय ऐसा भी था कि स्वप्ना को अपने लिए जूतों के लिए संघर्ष करना पड़ता था, क्योंकि उनके दोनों पैरों में छह-छह उंगलियां हैं। पांव की अतिरिक्त चौड़ाई खेलों में उनकी लैंडिंग को मुश्किल बना देती है, इसी कारण उनके जूते जल्दी फट जाते हैं।

 

स्वप्ना की मां ने भरे गले से कहा कि आज स्वप्ना ने जो कुछ कर दिखाया है, वो उसके लिए आसान नहीं था। वो हमेशा उसकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते थे, लेकिन स्वप्ना ने कभी भी शिकायत नहीं की।

 

 

स्वप्ना के बचपन के कोच सुकांत सिन्हा भी अपनी इस शिष्या की जीत से बेहद खुश हैं। कोच सुकांत ने बताया कि वह 2006 से 2013 तक स्वप्ना के कोच रहे। उन्होंने बताया कि स्वप्ना के परिवार की माली हालत ऐसी है कि स्वप्ना अपने खेल संबंधी महंगे उपकरण भी नहीं खरीद सकी। स्वप्ना के लिए अपनी ट्रेनिंग का खर्च उठाना तक मुश्किल होता है। उन्होंने आगे बताया कि जब स्वप्ना चौथी क्लास में थी, तब उनमें उन्होंने प्रतिभा देख ली थी, इसके बाद उन्होंने स्वप्ना को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया।

 

बता दें कि पिछले साल भी एशियाई ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वप्ना ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।

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