एडल्टरी अब अपराध नहीं, सोशल मीडिया पर मीम्स और जोक्स की बाढ़

Updated on 28 Sep, 2018 at 4:59 pm

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बीते कुछ दिनों से लगातार लैंगिक और यौनाचार मुद्दों पर लंबित फैसलों का निबटारा किया जा रहा है। ये भी गौर करने वाली बात है कि किसी भी मुद्दे पर फैसला पक्ष में ही दिया जा रहा है। ऐसे ही एक 158 पुराने कानून को सुप्रीम कोर्ट ने धत्ता बता दिया है। न्यायालय ने गुरुवार को अपने फैसले में व्यभिचार से संबंधित दंडात्मक प्रावधान को ही हटा लिया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायधीशों ने जो निर्णय दिए हैं, उस पर लोग जमकर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से धारा 497 यानी एडल्टरी को असंवैधानिक करार दे दिया है!

 

 

बता दें कि इस क़ानून के तहत विवाहेत्तर संबंध के मामले में पुरुष को पांच साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों की सजा का प्रावधान किया गया था। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरिमन, न्यायमूर्ति ए. एम.खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़ व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने सम्मति से इसे असंवैधानिक करार दिया है। जानकारी हो कि इस मामले की याचिका जोसेफ शाइन ने दर्ज करवाई थी। इसके तहत विवाहित महिला से विवाहेत्तर यौन संबंध के अपराध में सिर्फ पुरुष को ही दण्डित किया जाता था।

 

 

मामले की सुनवाई करते हुए इस बात पर गौर किया गया कि कानून तो लैंगिक दृष्टि से तटस्थ होता है और ये पुरुषों के साथ भेदभाव करता है। धारा 497 संविधान के अनुच्छेद 14 (समता), 15 (धर्म, जाति, लिंग, भाषा, जन्म स्थल के आधार पर समानता) और अनुच्छेद 21 (दैहिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। व्यभिचार चीन, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।

 

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद लोग सोशल मीडिया पर जमकर मजे ले रहे हैं। क़ानून मजाक का विषय होना नहीं चाहिए लेकिन लोगों ने मीम्स और जोक्स की बरसात कर दी है!

 

ये देखिए…

 

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