पत्रकारिता के पेशे के प्रति निष्ठा का अनुपम उदाहरण हैं सुप्रीत कौर

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Updated on 9 Apr, 2017 at 9:25 pm

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इन दिनों भारत में पत्रकारिता को शक की नजरों से देखा जाता है। किसी को बिकाऊ तो किसी को डिज़ाइनर पत्रकार का तमगा दिया जाता है। कभी पवित्र माने जाने वाले इस पेशे पर लांछन आम हैं। लेकिन कल की एक खबर ने यह साबित किया है कि इस पवित्र पेशे की अहमियत अब भी जिन्दा है।

छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय न्यूज चैनल आइबीसी-24 में न्यूज एंकर सुप्रीत कौर ने पत्रकारिता के दृढ़ संकल्प को जिस तरह से दुनिया के सामने रखा, उससे कइयों को सीख लेने की जरूरत है।

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इस पवित्र पेशे के प्रति सुप्रीत कौर की निष्ठा और पत्रकारीय धर्म का निर्वाह उन युवाओं को राह दिखाने वाला सच है, जो इस पेशे में सिर्फ इसलिए आना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें इसमें ग्लैमर दिखता है।

पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जिसमें इससे जुड़े इंसान को किसी भी विषम परिस्थिति का डटकर सामना करने के लिए हमेशा से तैयार रहना पड़ता है। आज के जो युवा इस पेशे में महज यह सोचकर जुड़ना चाहते है कि इसमें ग्लैमर है, इसमें जिंदगी चकाचौंध है, तो फिर ऐसे युवाओं के लिए सुप्रीत कौर के साथ जो कुछ भी घटित हुआ, वह वाकया आंख खोलनेवाला साबित हो सकता है।

सुप्रीत कौर एक सड़क दुर्घटना की ख़बर को ब्रेकिंग न्यूज़ के तौर पर पढ़ रही थी, लेकिन उस ब्रेकिंग न्यूज़ ने उन्हें पूरी तरह से सन्न करके रख दिया।


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जब सुप्रीत न्यूज बुलेटिन पढ़ रही थीं तभी उन्हें संवाददाता से एक दुर्घटना की खबर प्राप्त हुई। संवाददाता ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा में एक डस्टर कार को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। इस सड़क दुर्घटना में कार में सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

टीवी पर यह खबर देख रहे लोगों के लिए यह सड़क हादसे की एक खबर भर होगी, लेकिन 28 साल की सुप्रीत के लिए ये उनके जिंदगी की सबसे दुखद खबर रही।

उन्हें पता था कि उनके पति डस्टर कार में उसी रूट पर अपने साथियों के साथ यात्रा कर रहे थे, जहां यह दुर्घटना हुई है। नि:संदेह उन्हें यह खबर सुनकर शक हुआ, लेकिन उन्होंने समाचार पढ़ना जारी रखा।

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस वक्त सुप्रीत कौर की मनोदशा क्या रही होगी, जब वह टेलीविजन स्क्रीन पर अपने ही पति की मौत की ख़बर को बतौर ब्रेकिंग न्यूज़ पढ़ रही थीं।

जिस खबर को वह पढ़ रही थीं, वह उनके पति हर्षद गावड़े की सड़क हादसे में मौत की की खबर थी। न्यूज एंकर सुप्रीत ने अपने पेशे के प्रति निष्ठा दिखाते हुए, चेहरे पर बिना किसी हावभाव के खबर को पूरा पढ़ा और अपना बुलेटिन पूरा किया। बाद में खबर की पुष्टि करने के लिए उन्होंने अपने घरवालों को फोन किया जिसके बाद वह फूट-फूट कर रोने लगीं।

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सुप्रीत कौर अपने पति हर्षद गावड़े और सास ससुर के साथ। Facebook

कौर के सहकर्मियों ने बताया कि सुप्रीत को न्यूज पढ़ते वक्त ही आभास हो गया था कि हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें उनके पति भी हैं। फिर भी वह न्यूज पढ़ती रहीं। वाकई, सुप्रीत ने गजब के साहस का परिचय दिया, जो कि पत्रकारिता के क्षेत्र में अद्‍भुत है।

सुप्रीत कौर ने पत्रकारिता की पवित्रता, उसके कर्म को जिन्दा रखते हुए पत्रकारिता से जुड़े हर शख्स के सामने एक उदाहरण रखा है कि सूचनाएं पहुंचाना उनका पहला धर्म है। किसी भी बड़ी से बड़ी विपरीत परिस्थिति में खुद का आत्मसंयम बनाए रखना इस पेशे की गरिमा है या कहें कि खासियत है।

यह एक ऐसा पेशा है, जिसमें आपको अपनी  भावनाओं को मजबूत कर एक निष्ठुर योद्धा की तरह अपना पत्रकारीय धर्म पूरी निष्ठा से निभाना होता है।

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