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क्या आनंद कुमार ‘सुपर 30’ के नाम पर मोटी फीस लेते हैं? IIT में छात्रों के सफल होने के दावे भी झूठे!

Published on 25 July, 2018 at 5:42 pm By

इस साल की IIT परीक्षा का रिजल्ट आया तो एक बार फिर से सुपर 30 सुर्ख़ियों में छा गया। सुपर 30 के 26 विद्यार्थियों द्वारा इस साल की परीक्षा में भी सफल होने की खबर आई, लेकिन हाल ही में IIT के एंट्रेस एग्जाम की तैयारी कराने वाला यह चर्चित संस्थान विवादों में घिर गया है। असंख्य छात्रों के मसीहा और प्रेरणा कहलाने वाले आनंद को लेकर एक हैरान कर देने वाली खबर आ रही है।


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सुपर 30 के पूर्व छात्रों ने आरोप लगाया है कि अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए आनंद कुमार ने जालसाजी और झूठ का सहारा लेते हैं।

 

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंद  कुमार पर आरोप लगा है कि वो आईआईटी के अपने संस्थान के रिजल्ट को बढ़ाचढ़ा कर पेश करते हैं। इतना ही नहीं, वह दूसरे इंस्टीट्यूट से पढ़ें हुए छात्रों को अपने संस्थान सुपर 30 का बताते हैं।

 

 

पूर्व छात्रों ने बताया कि इस साल सिर्फ 3 स्टूडेंट्स ही एंट्रेंस टेस्ट पास कर पाए, लेकिन आनंद कुमार ने सबको कुछ और ही बताया। आनंद कुमार ने इस साल दावा किया था कि जेईई की परीक्षा में इस बार 30 में से 26 छात्रों ने ही सफलता हासिल की है। कुछ पूर्व छात्रों का कहना है कि ये सब जालसाजी है। इस बार 30 में से 22 छात्रों को ही आनंद कुमार ने पढ़ाया है, जिसमें से मात्र तीन ही रेगुलर स्टूडेंट्स आईआईटी क्वालिफाई कर सके। इन तीनों के नाम अनुपम, गगन और ओनरजीत हैं।


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छात्रों ने ये भी खुलासा किया कि इन तीन छात्रों में से सिर्फ ओनरजीत ही ‘सुपर 30’ से जुड़ा हुआ था। बाकी दो छात्रों ने दूसरे कोचिंग इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की, जिन्हें आनंद कुमार ने अपना छात्र बता दिया।

 

 

आनंद कुमार पर ये भी आरोप लगा है कि वह सुपर 30 के नाम पर अलग से रामानुजम क्लासेज भी चलाते हैं, जहां हजारों बच्चे पढ़ते हैं। इन छात्रों से अच्छी खासी मोटी रकम वसूली जाती है।  कभी आनंद के नजदीकी रहे विद्यानंद उपाध्याय ने पटना के होटल रिपब्लिकन में रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आनंद पर संगीन आरोप लगाए।

 

उपाध्याय ने बताया कि सुपर 30 में अपने बच्चों का दाखिला करवाने की चाहत में आनंद के पास बहुत सारे लोग आते हैं। उपाध्याय के मुताबिक, यहां आए लोगों को आनंद समझाते हैं कि वे इस साल कहीं से पैसों का इंतजाम करके रामानुजम क्लासेज में बच्चों का दाखिला करा लें। अगले साल उनको सुपर-३० में ले लिया जाएगा। घर वाले इस शर्त को मान लेते हैं। उपाध्याय की मानें तो यही आनंद कुमार का फर्जीवाड़ा है। रामानुजम के एक बैच में तकरीबन 400 से 500 छात्र होते हैं। इस तरह के यहां 7 से 8 बैच चलते हैं। उपाध्याय का आरोप है कि यहां के जिन छात्रों ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में कामयाबी हासिल की, उन्हें बाद में सुपर 30 का छात्र घोषित कर दिया गया। यह भी आरोप है कि 2015 से आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफल छात्रों की संख्या बेहद कम हो गई। इसके बाद, आनंद कुमार ने अन्य कोचिंग संस्थानों के बच्चों को सुपर 30 का बताना शुरू कर दिया और समाज में तारीफ बटोरी।



 

 

छात्रों का दावा है कि कई स्टूडेंट जो ‘सुपर 30’ में दाखिला लेना चाहते थे उन्हें रामानुज क्लासेस में दाखिला लेने को मजबूर किया गया। इस कोचिंग में उन्हें 33,040 रुपए कोचिंग फीस के तौर पर चुकाना पड़ा था।

 

 

इस बीच, सुपर 30 के कुछ पुराने छात्रों ने ही सामने आकर आनंद कुमार पर लग रहे आरोपों को निराधार बताया है। संस्थान के पुराने छात्रों का कहना है कि सुपर 30 को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। पुराने छात्रों ने संस्थान पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने यहीं से पढ़ाई कर आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास की है।

 

 

सुपर 30 के पुराने छात्र राकेश कुमार ने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट डालकर कहा कि संस्थान के 16 साल के ट्रैक रिकॉर्ड को खराब करने के लिए कुछ लोग सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं, जो समझ से परे है।

 

ऐसे ही एक अन्य छात्र सुमित कुमार भी आईआईटी की सफलता के लिए आनंद को धन्यवाद देते है। उन्होंने कहा, ‘आनंद सर को बदनाम करने की एक साजिश हो रही है, जिसे देखकर दुःख होता है।’ इसी तरह अन्य छात्रों ने भी अपने फेसबुक वॉल पर इस संदर्भ में आरोपों को खारिज किया है।

 

 

2002 में आनंद कुमार द्वारा शुरू किए इस संस्थान में जेईई परीक्षा के लिए कमजोर तबके के 30 प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षा दी जाती है। यह संस्थान पटना में है। कहा जाता है कि आनंद कुमार पिछले 16 सालों से यहां मुफ्त में गरीब तबके के 30 प्रतिभाशाली छात्रों को आईआईटी एंट्रेस एग्जाम की तैयारी कराते हैं। इस काम में उनका पूरा परिवार उनका साथ देता है। यहां पर स्टूडेंट्स को भोजन और रहने की सुविधा भी दी जाती है। उनकी मां खुद घर में सभी 30 स्टूडेंट्स के लिए खाना बनाती हैं और आनंद और उनके भाई प्रणव कुमार बच्चों को आईआईटी की तैयारी करवाते हैं।

आनंद कुमार पर एक बायोपिक भी बना रही है, जिसमें रितिक रोशन मुख्य किरदार निभा रहे हैं। विकास बहल द्दारा निर्देशित यह फ़िल्म शुरूआत से लेकर अभी तक सुर्खियों में बनी हुई है।  यह फिल्म बिहार के रहने वाले आनंद के संघर्षों पर आधारित होगी।


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