चीन की सीमा के नजदीक मिला सुखोई-30 फाइटर प्लेन का मलबा

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Updated on 26 May, 2017 at 3:44 pm

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भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 फाइटर प्लेन का मलबा मिल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुखोई का मलबा तेजपुर में चीन की सीमा के नजदीक मिला है। यह विमान मंगलवार को तेजपुर एयरबेस से उड़ान भरने के बाद लापता हो गया था। इस विमान में सवार दोनों पायलट का अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। जब यह विमान लापता हुआ था, उस वक्त उसकी लोकेशन चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश में डौलासांग इलाके में दर्ज की गई थी।



एयरफोर्स में 240 सुखोई हैं। इनमें से 8 के साथ हादसा हो चुका है। इसी साल 15 मार्च को राजस्थान के बाडमेड़ में एक सुखोई-30 फाइटर जेट गिरकर क्रैश हो गया था। इस हादसे में तीन गांव वाले घायल हो गए थे।

दो-इंजन वाले सुखोई-30 एयरक्राफ्ट का निर्माण रूस की कंपनी सुखोई एविएशन कॉरपोरेशन ने किया है। सुखोई विमान को भारत की रक्षा जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। यह खराब मौसम में भी उड़ान भरने में सक्षम है। हालांकि, एक के बाद एक सुखोई विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने से चिंता बढ़ रही हैं।

एक सुखोई विमान की कीमत 400 करोड़ रुपए के करीब है।

अब तक 8 सुखोई विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।

देश में पहला और दूसरा सुखोई विमान क्रमश: 30 अप्रैल 2009 और 30 नवंबर 2009 को राजस्थान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। तीसरा सुखाई 13 दिसम्बर 2011 को में पुणे में, चौथा सुखोई फिर से 19 फरवरी 2013 को राजस्थान में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पांचवां सुखोई अक्टूबर 2013 को पुणे में गिरा। छठा सुखोई 19 मई 2015 को असम में तेजपुर के पास गिरा। फिर 15 मार्च को एक सुखोई राजस्थान में गिरा। तेजपुर के पास हुई घटना इस तरह का आठवां मामला है।


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