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सुहागरात से जुड़ी ये बातें बहुत कम लोग ही जानते हैं

Published on 20 April, 2019 at 4:05 pm By

भारतीय संस्कृति मनुष्य के संस्कार पर आधारित है। जन्म से लेकर मृत्यु तक अलग-अलग तरह के कुल 16 संस्कार होते हैं। इन्हीं में से एक विवाह संस्कार भी है। मॉडर्न होने की दुहाई देते हुए भले आज विवाह के मायने बदल गए हों, लेकिन ये दो लोगों का ही नहीं, बल्कि परिवार और समस्त समाज से जुड़ाव का एक बड़ा पर्व होता है। यही कारण है कि विवाह में सभी सगे-संबंधी जुटते हैं और वर-वधु को आशीर्वाद देते हैं।


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हिन्दू धर्म में विवाह के समय कई तरह के रस्म-रिवाज़ निभाए जाते हैं। इन सबके अलग-अलग मायने और महत्व हैं। ऐसा ही एक रस्म है सुहागरात (Suhagrat), जिसमें वर-वधु का मिलन होता है।

 

यहां जानते हैं कि सुहागरात (Suhagrat) में जो रस्म किए जाते हैं उनके मायने क्या हैं। सबसे पहले आपको बता दें सुहागरात के दिन दुल्हा-दुल्हन पूजा करते हैं, जो कुल देवी अथवा देवता होते हैं। इनसे आशीर्वाद लेकर अपनी जीवन की नई पारी शुरू करते हैं। मान्यता है कुल देवता की कृपा से कुल की बढ़ोतरी होती है। ज़ाहिर है इसका सीधा संबंध संतान प्राप्ति से है।

 

 

सुहागरात से पहले होने वाली रस्मों में पूर्वजों की पूजा भी प्रमुख है। बताया जाता है पितर अर्थात पूर्वजों को प्रसन्न कर संतान बाधा दूर की जाती है। अगर पूर्वजों की पूजा नहीं करेंगे तो संतान होने में बाधा हो सकती है, ऐसा ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है। लिहाज़ा लोग पितरों की पूजा करते हैं।



 

 

ये बेहद पॉपुलर रस्म है जिसमें दुल्हन अपने पति को दूध का गिलास देती है। ज्योतिष के अनुसार दूध को चन्द्र और शुक्र का प्रतीक माना गया है। दूध के सेवन से पति पत्नी का प्रेम, वासना और धैर्य बना रहता है। ज़्यादातर फ़िल्मों में ये दृश्य दिखाया गया है, जो बड़ी रस्म का छोटा हिस्सा होता है।

सुहागरात पर दुल्हन को मुंह दिखाई देने का रिवाज़ भी बहुत पुराना है। कहा जाता है भगवान राम ने भी माता सीता को मुंह दिखाई दी थी। आजकल मुंह दिखाई के रूप में आभूषण तथा मोबाइल देने का चलन है। ज़ाहिर है गिफ्ट देकर लोग अच्छे संबंध की नींव रखते हैं।

 

 


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सबसे महत्वपूर्ण बात होती है बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना। सुहागरात (Suhagrat) के अवसर पर वर-वधू सबकी शुभकामनाएं लेकर नये जीवन की शुरुआत करते हैं। बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद पाकर जीवन की इस यात्रा में कदम बढ़ाते हैं। इस प्रकार इन रिवाज़ों के अलग-अलग मायने हैं, जो बेहद अर्थपूर्ण हैं।

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