भारतीय किसान ने विकसित की सुगर-फ्री गेहूं, मधुमेह के मरीजों को होगा फायदा

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Updated on 1 Aug, 2017 at 12:51 pm

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भारत के एक किसान ने सुगर-फ्री गेहूं की नस्ल को विकसित करने का दावा किया है। मध्य प्रदेश के सीहोर में रहने वाले किसान राजकुमार राठौर ने गेहूं की नई किस्म ए-10″ की खोज की है। राठौर कहते हैं कि यह बदलाव प्रकृति की वजह से हो सका है और इसमें सूर्यग्रहण का बड़ा हाथ है। इस गेहूं का आकार सामान्य की बजाए हल्का गोल है।

राठौर कहते हैं कि वह गेहूं की इस किस्म को उपजाने के लिए रसायन का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसा करने से इसके नष्ट होने का खतरा रहता है।

गेहूं की नयी किस्म कुछ ऐसी दिखती है।

ऐसे पता चला सुगर-फ्री गेहूं का

किसान राठौर ने बताया कि उनके पिता बायोडायवर्सिटी को लेकर प्रयोग करते रहते थे। करीब 6 साल पहले अपने खेत में गेहूं बोया था। सूर्यग्रहण के कुछ दिन बाद खेत में कुछ पौधों की वृद्धि असामान्य दिखी। इसके बाद इन पौधों पर नजर रखी गई। जब उन पौधों से बीज निकले तो उन्हें अलग इलाकों में बोकर कुछ और बीज तैयार किए गए। जब उनकी जांच कराई गई तो उनमें ग्लूकोज और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सामान्य गेहूं से काफी कम मिली। इस गेहूं के आटे से बनी रोटी राठौर की मां ने कुछ दिनों तक सेवन किया और उनका सुगर कंट्रोल हो गया। इसके बाद इसे सुगर-फ्री गेहूं नाम दिया गया।



सामान्य गेहूं के दाने।


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बताया गया है कि ऐसा प्राकृतिक बदलाव की वजह से संभव हो सका है, जो विशेषकर सूर्यग्रहण के दौरान होता है।


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