ये है दुनिया का इकलौता संस्कृत अखबार ‘सुधर्मा’, भारत में होता है प्रकाशित

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Updated on 26 Mar, 2017 at 5:59 pm

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आप अंग्रेजी, हिंदी या दोनों भाषाओं के अखबार पढ़ते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने संस्कृत अखबार पढ़ा है? क्या आपको पता है कि एक ऐसा भी अखबार है जो केवल संस्कृत में प्रकाशित होता है? जी हां, ‘सुधर्मा’ भारत ही नहीं, दुनिया का एकमात्र  दैनिक अखबार है जो संस्कृत में प्रकाशित होता है।

साल 1970 में शुरू हुआ यह अखबार मैसूर से प्रकाशित किया जाता है। पोस्ट के जरिए यह पाठकों तक पहुंचाया जाता है। इस अखबार की रोजाना लगभग 2,000 प्रतियां बिकती हैं।

देशभर में इसके पाठक  कर्नाटक, जम्मू और कश्मीर, और उड़ीसा के साथ-साथ विदेशों में भी हैं।

इसके ई-पेपर के एक लाख से ज्यादा पाठक हैं, जिनमें ज्यादातर जापान और अमेरिका के हैं।

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संस्कृत के विद्वान कलाले नांदुर वरदराज आयंगर ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से 1970 में इस अखबार की शुरुआत की थी।

जब उन्होंने लोगों के सामने संस्कृत में अखबार को प्रकाशित करने के विचार को रखा, तो उन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन अपने दोस्तों की मदद से वह आगे बड़े और 14 जुलाई, 1970 को संस्कृत अखबार का पहला प्रकाशन शुरू किया।

बाद में, आयंगर ने तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री आईके गुजराल को ऑल इंडिया रेडियो पर दैनिक संस्कृत बुलेटिन शुरू करने के लिए राजी भी किया।

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अब इस अखबार की जो दुर्दशा है वो वाकई संस्कृत भाषा के लिए घातक है। इस अखबार से बेहद की कम रेवेन्यू आता है। इसके बावजूद आयंगर के पुत्र और ‘सुधर्मा’ के संपादक के वी संपत कुमार इस अखबार को इसलिए प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि भाषा का प्रचार होता रहे।


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