मिलिए इन इंजीनियरिंग के छात्रों से जो पुराने अखबारों को बेचकर खरीद रहे हैं गरीबो के लिए कंबल

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6:59 pm 24 Dec, 2016

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युवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है जो अपनी सोच से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखता है। युवा देश का वर्तमान है तो भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं। युवा देश और समाज के मूल्यों के प्रतीक हैं। कुछ ऐसा ही देखने को मिला है तेलंगाना के बीटेक के छात्रों की सोच में, जिनका एक छोटा सा प्रयास समाज को मानवता की राह पर चलने की सीख दे रहा है।

तेलंगाना के मियापुर और सेरिलिंगमपाली में बीटेक के छात्रों के दो गुटों ने यह संकल्प लिया है कि वे गरीब असहाय लोगों को इस ठिठुरती ठंड में कंबल बाटेंगे। इस दिशा में वे अपने आस-पास इलाकों के घरों से पुराने अखबार इकट्ठा कर रहे हैं, जिसे बेच कर वे कंबल खरीदने के लिए धन जुटा रहे हैं।

इस मुहीम की शुरआत बीटेक के छात्र अमित पांडे ने की। ‘यूथ ऑफ नेशन’ के सदस्य अमित कहते हैं कि उन्होने एक गरीब को सर्दी से बचने के लिए अखबार लपेटे हुए देखा, जिसके बाद यह विचार आया कि अगर आसपास की कॉलोनियों और अपार्टमेंट से पुराने अखबारों को इकट्ठा किया जाए तो वे उन अखबारों को बेच कर ग़रीब असहाय लोगों को मदद पहुंचा सकते हैं।


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अमित पांडे बताते हैं कि इसके लिए उन्होने कुछ छात्रों के सहयोग से दो गुटों की एक टीम बनाई। जिन्होने कुछ ही दीनो में मियापुर और जेपी नगर से 1,000 किलो रद्दी के अखबार जमा कर लिए, जिसे बेच कर उन्होने 10,000 रुपए जोड़ लिए। अमित पांडे के मुताबिक, उन्होने ऐसे 250 लोगों की पहचान की है, जिन्हें कंबल की जरूरत है और टीम उनके लिए कंबलों की व्यवस्था कर रही है।

वही सेरिलिंगमपाली में लगी एक अन्य टीम का नेतृत्व कर रहे छात्र श्रीकांत ने बताया कि उनकी टीम ने करीब 430 किलो अखबार जमा किए और इसे बेचकर 4,000 रुपए की व्यवस्था की।

नि:संदेह युवा देश और समाज के उत्थान में एक अभिन्न अंग है। अमित पांडे और श्रीकांत जैसे युवाओं से प्रेरणा प्राप्त करके समस्त देशवासियों को देश के विकास के लिए अपना अहम योगदान प्रदान करना चाहिए।

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