भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेलने वाले इस लड़के की दास्तां आपका दिल पिघला देगी

11:50 am 6 Jul, 2018

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जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है और यह सबको अपने-अपने स्तर पर जूझने को मजबूर करता है, लेकिन किसी-किसी की कहानी आपके आंखों में आंसू ला देती है। लंबे संघर्ष के बावजूद सफलता सबको नसीब नहीं होती है। संघर्ष के बाद सफलता को करीब से महसूस करने का सुख अलग ही होता है। यही आजकल अंडर-19 क्रिकेट खेलने वाले क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल के साथ हो रहा है।

अंडर-19 क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल।

 

 


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जायसवाल जल्द ही श्रीलंका टूर के लिए भारत की अंडर-19 टीम के साथ जुड़ने वाले हैं, लेकिन इनकी दास्तां आपको सोचने पर मजबूर कर देगी!

 

17 साल के जायसवाल ने यूपी से मुंबई आकर क्रिकेटर बनने का जो सपना देखा, वो हकीकत बनने के बेहद करीब हैं। सिर्फ 11 साल की उम्र में वे रात में ग्राउंडस्मैन के साथ मुंबई के आज़ाद मैदान में क्रिकेट क्लब के टेंट में सोया करते थे। उन्हें एक डेयरी से निकाल दिया गया था, लेकिन कड़ी मेहनत से सूरत बदल चुकी है।

 

 

मुंबई के अंडर-19 कोच सतीश सामंत के अनुसारः

“जायसवाल गजब का खेलता ही नहीं है, बल्कि खेल को लेकर उसकी समझ असाधारण है। वह बेहद एकाग्रता से खेलता है। हम सभी को उस पर बहुत ही भरोसा है कि एक दिन वह क्रिकेट का सितारा बनेगा।”



 

 

बता दें कि भदोही में यशस्वी के पिता एक छोटी दुकान चलाते हैं। दो भाईयों में छोटे यशस्वी ने जब मुंबई का रुख किया तो उसके पिता ने उसे नहीं रोका। दरअसल, उस समय उसके पिता को परिवार चलाने में बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ता था। जब वे अंकल संतोष के पास मुंबई आए तब उनके घर में भी सीमित जगह थी, लिहाजा वह एक क्लब के टेंट में रहे।

 

 

दिनभर क्रिकेट खेलने के बाद इतनी ऊर्जा नहीं बचती थी कि दुकान में काम कर सकें, लिहाजा उन्हें वहां से निकाल दिया गया। बाद में अपने गुजारे के लिए वे रामलीला के दौरान आज़ाद मैदान में पानी-पूरी बेचते। बाद में खेल में मन लगाया और सप्ताह के 200-300 कमा लेते थे। जायसवाल ने बताया कि स्थानीय कोच ज्वाला सिंह ने उसकी बेहद मदद की।

आज भी जायसवाल खुद को खाने का मुहताज बताता है। इस खिलाड़ी के लिए दिल से दुआ है!


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