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आवारा पशुओं की देखभाल करने वालों को इन 15 परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है

Published on 4 May, 2016 at 12:19 pm By

 जानवरों की सहायता करने वालों को कई बड़ी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। आइए देखते हैं कौन से ऐसे हालात हैं, जिनका सामना इन लोगों को अक्सर करना पड़ता है।

1. आप होते हैं लोगों के गुस्से का शिकार।

ऐसे कई हैं जो नहीं चाहते हैं कि इन भटके हुए मासूम जानवरों को खाना मिले। या उनकी देखभाल की जाए। इन लोगों ने अपने दिमाग में यह बात बसा ली है कि ये जानवर हानिकारक हैं। जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है।

इसी तरह कुछ माताएं इस बात से डरती हैं कि कुत्तों से उनके बच्चों को खतरा है। इस बात से बच्चों में भी डर की भावना घर कर जाती है। उसके बाद इनकी देखभाल करने वालों से बुरा व्यवहार किया जाता है।

2. लोग आप पर हमला करते हैं।


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अगर लोगों ने देख लिया कि आप आवारा जानवरों की देखभाल करते हैं या उनके हिमायती हैं, तो आपको धमकियां मिल सकती हैं। आवारा पशुओं की देखभाल करने वाले लोग आपको बता सकते हैं कि उन्हें किस शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी। कभी-कभी तो लोगों की जान तक खतरे में पड़ जाती है।

कोलकाता की एक घटना का उदाहरण है। बनेश्वर साहु जरूरतमंद जानवरों को न केवल खाना खिलाते थे, बल्कि उन्हें चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध कराते थे। लेकिन इसका दंड उन्हें अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। उनके पड़ोसी ने उन पर हमला कर दिया। सिर पर लोहे का सरिया दे मारा।

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3. लोग आपका मजाक बनाते हैं।

कुछ लोगों के अनुसार बेसहारा भटके हुए जानवरों पर पैसा खर्च करना महज पागलपन है। अगर आप किसी पशु को खाना खिलाते हैं या उसे टीका लगवाते हैं, तो लोग आपसे ये पूछते हैं कि तुम अपना पैसा इन पर क्यों बर्बाद कर रहे हो।

वे नहीं समझते कि इन पशुओं को सेहतमंद बनाकर आप बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए कितना बड़ा काम कर रहे हैं।

4. आप इन भटके हुए पशुओं के बीच रहकर सुरक्षित महसूस करते हैं।

मै जहां भी रहा, मैंने हमेशा इन भटकते हुए कुत्तों की देखभाल की। यकीन मानिए मैनें इनके बीच खुद को हमेशा ही 100 फीसदी सुरक्षित महसूस किया। चाहे वो दिन का समय हो, या रात का।

मुझे कोई असहजता महसूस नहीं होती, क्योंकि मेरे पास दुनिया के सबसे भरोसेमंद दोस्त हैं, जो शायद ही किसी को नसीब होते। यहां तक की कुछ लोग जो इन पशुओं को कभी-कभी खाना खिलाते हैं, वे भी मानते हैं की ये बहुत ही प्यारे और ईमानदार हैं।

5. आपके पैसों में निरंतर कमी आना।


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भटके हुए पशुओं के खान-पान और टीकाकरण के लिए काफी खर्चा उठाना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की हम इस जिम्मेदारी से दूर भाग जाएं और उन पर खर्च न करें।

एक सच्चा पशु प्रेमी और समाजसेवी ऐसा कभी नहीं करेगा।

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6. मायूसी भरे दिन।



ऐसे दिन भी आते हैं, जब आपकी इनके प्रति देखभाल, स्नेह और सहारा भी काम नहीं आता। वे आपको छोड़ हमेशा के लिए चले जाते हैं। और ऐसे दिन भी आते हैं, जब आपको इंसानियत का काला चेहरा देखने को मिलता है।

आप गवाह बनते हैं उस घटना का जिनमें मासूम पिल्लों को जहर देकर मौत दे दी जाती है। ऐसा लगता है मानो इच्छाशक्ति खत्म हो रही हो।

7. संतुष्टि से भरा दिन।

चाहे आप कुछ पिल्लों के साथ खेल रहे हों या किसी भटकी हुई बिल्ली का मन बहला रहे हों। सड़क पर आप किसी घायल पशु को ठीक होता देखें या फिर आपको कुछ ऐसे दिन मिलें, जिसमें कोई आपके पशु प्रेम में रुकावट न बने।

ऐसे दिन भी आते हैं, जब आपको लगता है की आपने बहुत कुछ हासिल कर लिया है। जितनी भी मुश्किलें आपने सही हैं, वह महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आपने प्रकृति के अनुरूप काम किया। तालमेल बिठाया और आपको पता चलता है की इसका विकास करने में आपका भी योगदान है।

8. बहुत कम पशु चिकित्सक सम्मान के योग्य हैं।

कोई भी मनुष्य यही सोचेगा यदि कोई पशु चिकित्सक बनना चाहता है, तो उसे स्वाभाविक रूप से पशुओ से प्रेम होगा। जब आप इन बेसहारा पशुओं की देखभाल करते हैं, तब आपका सामना कई चिकित्सकों से होता है, जो इन भटके हुए पशुओं का इलाज करने से मना कर देते हैं, क्योंकि उनके अनुसार ये केवल भटके हुए गंदे पशु हैं। आपको उन्हें “नमस्कार” करने से पहले यह स्पष्ट रूप से बताना होता है कि आप उन्हें पूरी फीस देने वाले हैं।

अगर आपकी किस्मत अच्छी रही, तो हो सकता है वे आपका काम करने के लिए अपने एक साथी को आपके पास भेज दें। यह बात स्पष्ट है कि जो पशु चिकित्सक आपके पशु का ईमानदारी से इलाज करते हैं, वे सच में सम्मान के हकदार होते हैं।

9. आपका एक पशु से लगाव बढ़ता है, लेकिन साथ ही दूसरों के लिए भी आपका दिल बहुत बड़ा हो जाता है।

बहुत से ऐसे लोग हैं, जो इन बेसहारा पशुओं की देखभाल करते हैं, भटके हुए कुत्तो का ख्याल रखते हैं, लेकिन अगर देखा जाए तो कुत्तों के अलावा भी ढेर सारे ऐसे पशु हैं, जिन्हें सहारे की ज़रूरत है। जिनमें शामिल हैं चिड़िया, बिल्ली, गाय, सांड और कई दुसरे घायल पशु, जिन्हें कोई सहारा नहीं मिलता और जिनकी देखभाल करने के लिए कोई भी नहीं है।

हम पशुओं के बारे में रोज नई चीजें सीखते हैं। यहां तक की उन पशुओं के बारे में भी, जिनसे हमें सबसे अधिक डर लगता था। मुझे बैल से तब तक ही डर लगता था, जब तक कि मैंने उसे अपने घर के पास घायल लेटे हुए नहीं पाया। थोड़े से इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया। तब से वह रोजना मेरे दरवाज़े के सामने आकर खड़ा हो जाता था। आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन असल में मैंने उसे पाल लिया था।

10. जब आपको एहसास होता है कि किस तरह मासूम बच्चों को उनके अभिभावक बहका देते हैं।

मैं आज तक कभी किसी ऐसे बच्चे से नहीं मिला, जो पैदा होते ही कुत्ते और बिल्लियों से डरने लगे। आमतौर पर बच्चों के माता-पिता ही बच्चों में जानवरों का खौफ पैदा कर देते हैं। एक बार मैंने देखा की हफ्ते पहले कुछ बच्चे पालतू पिल्लों के साथ खेल रहे थे, लेकिन अगले ही हफ्ते वे उनसे डरने लगे। जब मैनें पिल्लों से उनके डर की वजह पूछी, तो उन्होंने बताया कि उनके मम्मी-पापा ने कहा है की ये पशु खतरनाक हैं और उन्हें काट सकते हैं।

आप अक्सर देखते होंगे कि बच्चे पशुओं के साथ क्रूरता से पेश आते हैं और आप तुरंत अंदाजा लगा लेते हैं की ये क्रूरता की भावना उनमें कहां से आई।

11. नियमों को जानें और उत्पादों के बारे में जानकारी रखें।

दूसरों से कई तरह का विरोध झेलते – झेलते आप न सिर्फ अंदर से सशक्त हो जाते हैं, बल्कि आप ये भी जानना चाहते हैं कि कानून किस तरह आपके पक्ष में है और किस तरह आपके विरोध में।

आप हर उस खबर को ध्यान से सुनते हैं, जिसमें खाने और दवाई का हानिकारक असर, पशुओं के लिए सही और ख़राब उत्पादों की जानकारी और उस तरह का इलाज जो आप खुद कर सकते हैं। बस थोड़ा सा सब्र फिर आप खुद ही अपने सीखने पर आश्चर्य महसूस करेंगे।

12. आप कई और पशु प्रेमियों से मिलते हैं।

कभी-कभी ऐसा होता है, जब आप इन भटके पशुओं की देखभाल करते हैं और इसी दौरान पशु-प्रेमी जो अपने मोहल्ले में रहने वाले भटके पशुओं की देखभाल करते हैं, आपसे मिलने आपके पास आते हैं, ताकि वे आपसे इससे सम्बंधित चर्चा कर सकें।

जब आप देखते हैं कि ऑनलाइन फोरम पर इस तरह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, तब आपको ऐसा एहसास होता है की भटके हुए पशु की मदद करने के इस प्रयास में आप अकेले नहीं हैं, जिसे परिस्थितियों से लड़ना पड़ा है।

13. जब आपको ये पता चलता है कि आपका घर सिर्फ आपका नहीं, बल्कि आपके पशुओं का भी है।

ये शायद बहुत बड़ा सच है कि अगर आप अपनी भटकी बिल्लियों की देखभाल करते हैं, तो इससे उन्हें आपके घर आने जाने में आसानी हो जाती है। कभी-कभी तो मानो ऐसा लगता है कि मुझसे ज्यादा मेरी बिल्लियां मेरे घर में समय गुज़ारती हैं।

आप गर्भवती कुतिया और उसके बच्चों को अपने घर में जगह दे सकते हैं, ताकि वे शांति और सुरक्षा के साथ रह सकें और हो सके तो उन भटके हुए पशुओं को भी अपने घर में जगह दें, जो बाहर भारी बारिश और तेज़ ठंड की मार झेल रहे होते हैं। कारण कोई भी हो, आपके घर में आवश्यक वस्तुएं जैसे की अखबार, कटोरे, कम्बल आदि होने चाहिए, जिसकी जरूरत आपको किसी भी समय पड़ सकती है।

14. आप अपने इलाके के पशु विशेषज्ञ बन जाते हैं।

जब भी कोई पशु बीमार और जख्मी होता है या फिर उसका मालिक उसे छोड़ देता है, तब लोग आपके पास आते हैं और आपसे इस बारे में कुछ पहल करने के लिए कहते हैं। अक्सर लोग आपकी अच्छाई का गलत फायदा उठा लेते हैं और अपने पालतू जानवर आपके घर के पास छोड़ जाते हैं।

मोहल्ले के बच्चे इलाके की बिल्लियों और पिल्लों के बारे में खबर देते रहते हैं। और जब तब लोग आपके असली नाम से वाकिफ नहीं हो जाते तब तक आपको “कुत्ते वाले भैय्या या दीदी ” के नाम से पुकारा जाता है।

15. आपकी अपने काम के प्रति ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।


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कुछ समय इन भटके हुए जानवरों की देखभाल करने के बाद आपको यह अहसास होता है की जो भी आप कर रहे हैं, वह काफी नहीं है। इतनी मुसीबतों, हादसों और इन पर जानबूझकर की गई क्रूरता से आपको तब यह एहसास होता है कि नसबंदी करा देने से इनकी एक प्रकार से मदद की जा सकती है।

इससे इनका चिल्लाना और आक्रमकता कम हो जाती है और ये इनकी सेहत के लिए भी लाभकारी है। इस प्रकार आप इन बेसहारा और भटके जानवरों को एक सेहतमंद और खुशहाल जीवन देने की ज़िम्मेदारी लेना सीख सकते हैं।

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