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एक डॉक्टर की झिझक से हुआ था स्टेथोस्कोप का आविष्कार

5:28 pm 1 Sep, 2017

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आप सभी ने स्टेथोस्कोप तो देखा ही होगा, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर मरीज़ों की हार्ट बीट चेक करने के लिए करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि सबसे पहला स्टेथोस्कोप किसने बनाया होगा।

चलिए आज हम आपको बताते हैं स्टेथोस्कोप के आविष्कार की दिलचस्प कहानी।

स्टेथोस्कोप का आविष्कार किया था फ्रांसिसी वैज्ञानिक रेने लीनेक ने। लीनेक ने स्टेथोस्कोप का आविष्कार 1816 में किया था और इसकी वजह बनी उनकी शर्म और झिझक। दरअसल, स्टेथोस्कोप के आविष्कार से पहले डॉक्टर किसी मरीज की जांच के लिए उसके सीने के पास कान लगाकर उसकी धड़कनें सुनते थे। लीनेक जब हार्ट की किसी समस्या से जूझ रही महिला की जांच कर रहे थे तो उन्हें थोड़ी झिझक महसूस हुई।

लीनेक ने इस स्थिति से बचने के लिए कागज को मोड़कर उससे ट्यूब जैसी सरंचना बनाई. ट्यूब के एक सिरे को महिला के चेस्ट पर दबाया और दूसरे सिरे को अपने कान के पास लगाकर उसकी हार्ट बीट सुन ली। कहा जाता है कि लीनेक को ऐसा करने की प्रेरणा इसलिए मिली क्योंकि वह बांसुरी भी बजाया करते थे। तो लीनेक की यह झिझक स्टेथोकोप के आविष्कार की वजह बन गई।


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अपने इस प्रयोग से उत्साहित लीनेक ने बाद में लकड़ी के कई खोखले मॉडल बनाए, जिसके एक सिरे पर माइक्रोफोन लगा था और दूसरे सिरे पर ईयरपीस और उन्होंने इसे नाम दिया स्टेथोस्कोप।

लीनेक का यह आविष्कार फ्रांस से निकलकर धीरे-धीरे यूरोप और फिर अमेरिका तक फैल गया। 1826 में ट्यूबरक्‍यूलोसिस के कारण लीनेक की महज 45 वर्ष की उम्र में मौत हो गई, लेकिन उन्हें अपने इस महत्वपूर्ण आविष्कार के महत्व का अंदाजा अच्छी तरह से था इसलिए उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी विरासत कहा था।

 

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