ऐसे दिया जाता है तबाही मचाने वाले तूफानों को नाम, जानिए पूरी कहानी

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Updated on 14 Dec, 2016 at 3:54 pm

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आपने कटरीना, हुदहुद, आइला सरीखे तूफानों के नाम खूब सुने होंगे। लेकि क्या आपको पता है कि इन तूफानों का नामकरण कैसे होता है। जी हां, इन तूफानों के नामकरण की कहानी बेहद दिलचस्प होती है।

तूफानों का नाम देने की शुरुआत अटलांटिक क्षेत्र में वर्ष 1953 में एक संधि के माध्यम से हुई थी, ताकि इसकी तुरंत पहचान हो सके और समय रहते राहत-बचाव का कार्य किया जा सके। अटलांटिक महासागर के इलाकों में हरिकेन और चक्रवात का नाम देने की परंपरा वर्ष 1953 से ही जारी है, जो मियामी स्थित नैशनल हरिकेन सेंटर की पहल पर हुई।

हिन्द महासागर क्षेत्र में चक्रवातीय तूफानों के नाम देने की शुरुआत वर्ष 2004 से हुई। जब भारत की पहल पर आठ देशों पर सहमति हुई। इन देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यामां, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड शामिल हैं। इन सदस्य देशों द्वारा चक्रवाती तूफानों के नाम पहले ही तय कर लिए जाते हैं, ताकि समय रहते राहत व बचाव किया जा सके।



भारतीय उपमहाद्वीप में चक्रवातीय तूफानों के लिए अब तक कुल 64 नामों की सूची तैयार की गई है। भारत ने भी एक चक्रवात तूफान ‘लहर’ रखा था।

अभी दो दिन पहले तमिलनाडु में अाए चक्रवात का नाम ‘वरदा’ पाकिस्तान द्वारा दिया गया नाम है। इसका मतलब होता है लाल गुलाब।


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