स्टीव जॉब्स की बेटी ने बताया- पिता से नहीं थे अच्छे रिश्ते, मां को दूसरों के जूठे बर्तन धोकर घर चलाना पड़ा

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Updated on 4 Aug, 2018 at 4:26 pm

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स्टीव जॉब्स टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वो नाम है, जिनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। ऐपल प्रोडक्ट को सफल बनाने में स्टीव जॉब्स की सोच और रचनात्मकता का बहुत बड़ा हाथ रहा। ऐपल आज दुनिया में सबसे अमीर और प्रभावशाली कंपनियों में से एक है। आज के युवाओं के लिए स्टीव जॉब्स किसी प्रेरणा स्रोत कम से नहीं हैं। उन्होंने खुद अपने बलबूते पर फर्श से अर्श तक का सफर तय कर बुलंदियों को छुआ। उन्हें कई लोग अपना आदर्श मानते हैं , लेकिन हाल ही में स्टीव जॉब्स को लेकर उनकी बेटी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

 

 

लीसा ने अपनी किताब ‘स्माल फ्राई’ में अपने पिता के साथ रिश्तों पर कई बातें लिखी हैं। उन्होंने वेनिटी फेयर मैगजीन में लिखे एक आर्टिकल में किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं।

 

 

इस किताब में उन्होंने एक बेटी और उससे दूर रहने वाले पिता के बीच ठंडे रिश्तों की जटिलताओं को बताया है। स्टीव जॉब्स की बेटी लिसा ब्रेनन ने अपने किताब में बताया है कि कैसे उनके पिता ने उन्हें अपनी बेटी मानने से इनकार कर दिया था। उनके पिता ने कई सालों तक उन्हें नहीं अपनाया। और जब अपनाया तो भी बाप-बेटी के बीच हमेशा एक फासला बना रहा।

 

जानिए क्या थी दूरियों की वजह

 

1978 में जब लीसा ब्रेनन का जन्म हुआ उस समय मां क्रिशन ब्रेनन और स्टीव जॉब्स 23 साल के थे। क्रिशन ने एक दोस्त के फार्महाउस पर बेटी लीसा को जन्म दिया। क्रिसन और स्टीव ने एक दूसरे को करीब 5 साल तक डेट किया, लेकिन क्रिसन के बच्ची को जन्म देने के बाद स्टीव अलग-थलग रहने लगे।

 

स्टीव जॉब्स लिसा के जन्म के कुछ दिनों बाद उसे देखने भी आए, लेकिन वो सबसे यही कहने लगे कि ये उनकी बच्ची नहीं है।

 

steve jobs daughter

ऊपर वाली तस्वीर में लिसा अपनी मां के साथ, नीचे वाली तस्वीर में लिसा स्टीव जॉब्स की गोद में vanityfair

 

लीसा के मुताबिक, स्टीव जॉब्स ने उनकी मां की कोई आर्थिक मदद नहीं की। इसलिए घर का खर्च चलाने के लिए उनकी मां को घरों में बर्तन धोने का काम तक करना पड़ा। वहीं, स्टीव जॉब्स ने तो लीसा को अपना मानने से भी इंकार कर दिया। बेटी लिसा के 9 साल की होने तक स्टीव जॉब्स यही दावा करते रहे कि वो इन्फर्टाइल हैं और इसलिए वह पिता नहीं बन सकते।


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लिसा बताती हैं-

“मेरे दो साल का होने तक मेरी मां सोशल बेनिफिट्स लेने के अलावा बर्तन धोकर और नौकरियां करके घर चलाती रहीं। मेरे पिता से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। 1980 में कैलिफोर्निया की कोर्ट ने मेरे पिता से गुजारा भत्ता देने को कहा। तब उन्होंने एफिडेविट में झूठ बोला कि वो मेरे पिता नहीं है और वो पिता बन ही नहीं सकते। उन्होंने किसी और व्यक्ति का नाम देकर उसे मेरा पिता बताया।”

 

इसके बाद कोर्ट ने पटर्निटी टेस्ट का आदेश दिया और यह पुष्टि हो गई थी कि बच्ची के पिता स्टीव जॉब्स ही हैं। फिर अदालत ने उन्हें 500 डॉलर प्रति महीने के गुजारा भत्ते के अलावा सोशल इंश्योंरेंस का खर्च उठाने के लिए भी कहा।

 

 

इसके बाद स्टीव जॉब्स ने लिसा को अपना तो लिया लेकिन दोनों के रिश्तों में दूरियां ही थीं। एक वाकये का जिक्र करते हुए लिसा बताती हैं कि जब उनकी मां को सैन फ्रांसिस्को के कॉलेज में जाना होता था तो वो अपने पिता स्टीव जॉब्स के घर पर रुकती थीं। एक दिन जब लीसा ने स्टीव जॉब्स से पुछा कि जब पोर्श कार उनके किसी काम की नहीं रहेगी तो क्या वो उसे ले सकती हैं। इस पर स्टीव जॉब्स ने कहा, “बिलकुल नहीं। तुम्हें कुछ भी नहीं मिलेगा, कुछ भी नहीं।” लिसा बताती हैं कि ये कहते हुए उनकी आवाज में कड़वाहट थी, जिससे उन्हें बहुत चोट पहुंची।

 

 

स्टीव जॉब्स ने एक बार लिसा से ये भी कहा था कि उनमें से टॉयलेट सी बदबू आ रही है। ये उस समय की बात है जब लिसा स्टीव जॉब्स के आखिरी दिनों में उनसे मिलने जाया करती थी। एक दिन लिसा खुद पर गुलाब की खूशबू वाला सेंट छिड़क कर गई थीं, लेकिन स्टीव जॉब्स ने लिसा से कहा कि उनमें से टॉइलट सी बदबू आ रही है।

 

लिसा मानती हैं कि उनके जन्म पर शर्मिंदगी होना ही उनके पिता संग खराब रिश्ते की सबसे बड़ी वजह थी। हालांकि, वक्त के साथ-साथ स्टीव जॉब्स और लिसा के रिश्तों में थोड़ा सुधार जरूर हुआ, लेकिन उनकी बातचीत में कभी बेटी-पिता का रिश्ता नहीं झलका।

 

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