फ्रांस ने दोस्ती के प्रतीक के रूप में अमेरिका को भेंट की थी ‘स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी’

author image
Updated on 3 Sep, 2018 at 6:46 pm

Advertisement

अमेरिका की ऐतिहासिक ‘स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी’ मूर्ति के बारे में कौन नहीं जानता?

यह न्यूयॉर्क हार्बर में स्थित एक विशाल मूर्ति है, जो पूरी तरह तांबे से बनी हुई है। ‘स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी’ मूर्ति की ऊंचाई 151 फुट है। हालांकि, चौकी और आधारशिला मिला कर यह मूर्ति 305 फुट ऊंची है, जो करीब 22 मंजिली इमारत जितनी लंबी है।

इस मूर्ति के ताज तक पहुंचने के लिये 354 घुमावदार सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

zuza


Advertisement

अमेरिकी क्रांति के दौरान फ्रान्स ने दोस्ती के प्रतीक के तौर पर इस मूर्ति को 1886 में अमेरिका को उपहास्वरूप दी थी और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड ने ‘स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी’ का औपचारिक अनावरण किया था। इस मूर्ति का इतिहास रोचक है। यह महंगा उपहार लेने में अमेरिका हिचकिचा रहा था, क्योंकि इसकी स्थापना पर करीब 1 लाख डॉलर का खर्च होने की संभावना थी। अमेरिका की माली हालत इतनी अच्छी नहीं थी कि इतनी धनराशि एक मूर्ति की स्थापना पर खर्च की जा सके। यही वजह है कि यह मूर्ति लंबे समय तक पेरिस में उपेक्षित पड़ी रही थी। बाद में जोजेफ पुलित्जर ने, जो न्यूयार्क वर्ल्ड के प्रकाशक थे, इस कलात्मक प्रतिमा को अमेरीका लाने के उद्देश्य से एक कोष की स्थापना की, जिसमें देखते ही देखते लाखों डॉलर जमा हो गए और हिचकिचाते हुए ही सही अमेरिका ने फ्रान्स से यह भेंट स्वीकार कर लिया। अब हाथ में मशाल लिए यह विशालकाय प्रतिमा अमेरिका की पहचान बन चुकी है।

स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी को मशहूर फ्रेन्च शिल्पकार फ्रैडरिक आगस्ट बार्थोल्डी ने बनाया थ। इस पर करीब 2,50,000 डॉलर की लागत आई थी। इसके निर्माण के लिए फ्रेन्च जनता ने स्वेच्छा से चंदा इकट्ठा किया था। बाद में इसके गढ़ने का खर्च फ्रान्स की सरकार ने उठाया और स्थापना अमेरिकियों ने की।



वर्ष 1885 में इस प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को 214 बक्सों में बंद कर जहाज में लादकर फ्रान्स से अमेरिका भेज दिया गया। इसे जिस जहाज पर लाया गया उसका नाम इसेरो था। अंततः सारी बाधाएं दूर हुईं और इसे न्यूयॉर्क में स्थापित किया गया। तांबे की सवा तीन इंच मोटी चादर से बनी इस प्रतिमा का कुल वजन 4,50,000 पाउंड है।

स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी को वर्ष 1924 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया। आज इसे देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से भीड़ उमड़ती है।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement