श्रीनिवास रामानुजन ने दिए गणित के ऐसे-ऐसे सिद्धांत, जो हर किसी के बस की बात नहीं

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Updated on 27 Dec, 2018 at 1:29 pm

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1887 में 22 दिसम्बर को जन्मे विख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने अपने 33 साल के जीवनकाल में पूरी दुनिया को गणित के अनेक सूत्र और सिद्धांत दिए। गणित के क्षेत्र में अपने समय के अनेक दिग्गजों को पीछे छोड़ने वाले रामानुजन ने गणित के क्षेत्र में ऐसी महत्वपूर्ण स्थापनाएं दी, जिनसे सारा विश्‍व हैरान हो उठा।

 

 


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महज़ 12 साल की उम्र में रामानुजन ने ट्रिग्नोमेट्री में महारत हासिल कर ली थी और खुद की बनाई कई थ्योरम स्थापित की थी। गणितीय विश्लेषण और थ्योरी नंबर में उनका विशेष योगदान है।

 

 

गणित सीखने के लिए कोई विशेष प्रशिषण नहीं लेने वाले रामानुजन ने 17 साल की ही उम्र में कई जटिल रिसर्च पूरी की, जिसमें बरनौली नंबर भी शामिल थे।

 



 

रामानुजन ने उच्च गणित के क्षेत्रों जैसे संख्या सिद्धान्त, इलिप्टिक फलन, हाईपरज्योमैट्रिक श्रेणी इत्यादि में अनेक महत्त्वपूर्ण खोज कीं। बचपन से ही विलक्षण प्रतिभावान रहे रामानुजन ने खुद से गणित सीखा और अपने जीवनभर में गणित के 3,884 थेओरम्स का संकलन किया।

 

 

रामानुजन गणित के क्षेत्र में किए गए किसी भी कार्य को आध्यात्म का ही एक महत्वपूर्ण अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे, बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे। वे कहते थेः

“मेरे लिए गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार न मिलते हों।”


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