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पश्चिम बंगाल में बचे हैं सिर्फ 125 गिद्ध, जानिए क्यों लुप्त होने के कगार पर है यह जीव

11:26 am 6 Sep, 2017

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यूं तो लगभग डेढ़ दशक से गिद्धों की विलुप्त होती प्रजातियों पर सरकार व निजी संस्थाओं द्वारा चिंता प्रकट की जा रही है, लेकिन उन्हें बचाने की दिशा में कुछ ख़ास कदम नहीं उठाए जा सके। यह पता लगाना जरूरी था कि आखिर गिद्ध विलुप्त क्यों हो रहे हैं।

बात में यह बात निकलकर सामने आई कि मवेशियों को दी जाने वाली दवाइयों की वजह से गिद्धों की प्रजनन क्षमता खत्म होती गई। और इस तरह ये विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए। अब आलम यह है कि गिद्धों के लिए संरक्षण और प्रजनन केंद्र बनाए गए हैं। ये केन्द्र पश्चिम बंगाल के अलावा हरियाणा, असम और मध्य प्रदेश में हैं।


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पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहां गिद्धों की स्थिति बेहद दयनीय है। राज्य में कुल 125 गिद्ध बचे हुए हैं, जिन्हें अलीपुरद्वार के प्रजनन केंद्र में रखा गया है। इस प्रजनन केन्द्र को बॉम्बे नैचरल हिस्ट्री सोसायटी ने बनवाया था। दरअसल, प्रजनन केंद्र में गिद्धों को बचाने को लेकर कदम उठाए जाते हैं, लेकिन यहां कारगर तरीकों को अपनाने के बावजूद गिद्धों के संरक्षण में कोई बड़ी सफलता नहीं मिल सकी है।

बॉम्बे नैचरल हिस्ट्री सोसायटी के डॉक्टर विभू प्रकाश के अनुसारः

“गिद्धों की संख्या में कमी पशुओं को दी जानेवाली विषैली दवाएं हैं। इन पशुओं के शवों को खाकर गिद्ध मरते हैं। विषैली दवाओं के वजह से गिद्धों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इन दवाओं के प्रभाव से गिद्धों का हार्ट अटैक होता है और वे मर जाते हैं।”

हर साल सितम्बर के पहले शनिवार को अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या सिर्फ दिवस भर मना लेने से गिद्ध बचे रह जाएंगे? एक रिसर्चर की मानें तो गिद्ध बिना समुचित देखभाल और डर के साथ रखे जाएंगे तो इनको बचाना मुश्किल हो जाएगा। सबसे पहले पारसी समुदाय के लोगों ने महसूस किया कि गिद्ध तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। बॉम्बे नैचरल हिस्ट्री सोसायटी की स्थापना का मूल उद्देश्य पक्षियों का संरक्षण करना है।

गिद्ध मुर्दाखोर होते हैं, लिहाजा वे पर्यावरण को संतुलित रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं। गिद्धों का कम होना चिंता का विषय है। अलीपुरद्वार के प्रजनन केंद्र का लक्ष्य प्रजनन के द्वारा गिद्धों की संख्या कम से कम 600 करने का है। इस पक्षी को बचाने का सही समय पर सही उपाय करना अत्यावश्यक है।

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