आखिर क्यों मची है दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेत्रियों में नाभि दिखाने की होड़ ?

Updated on 8 May, 2018 at 5:57 pm

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फिल्म उद्योग को ग्लैमर वर्ल्ड भी कहा जाता है और इस लिहाज से ग्लैमर इसका अभिन्न अंग है। बॉलीवुड इस ग्लैमर का इस्तेमाल हॉलीवुड से प्रभावित होकर करता है। फिल्मों में अभिनेत्रियों को पेश करने के लिए अपना अलग ही नजरिया है। बेहद कम फ़िल्में हैं जो कहानियों के साथ न्याय करते हुए अभिनेत्रियों को अवसर देती है। हालांकि, इसमें दर्शकों के मनोविज्ञान को समझकर ही ग्लैमर परोसा जाता है।

 

साफ़-सुथरी फिल्मों में भी बड़ी चालाकी से ग्लैमर का इस्तेमाल किया जाता है और निर्माताओं ने इसका अपना फ़ॉर्मूला निकाल रखा है। कभी कहानी की मांग के बहाने तो कभी दर्शकों की मांग को देखते हुए अभिनेत्रियों को अंग प्रदर्शन करते दिखाया जाता है। कला जगत का ये बेहद स्याह पक्ष है, जिस पर गाहे-बगाहे चर्चा होती रहती है।

 


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बॉलीवुड में ग्लैमर का तड़का लगाने के लिए अभिनेत्रियों को छोटे कपड़े पहने दिखाया जाता है। इसमें लम्बी टांगें और चेस्ट दिखाने का रिवाज चल निकला है। वहीं, साउथ की फ़िल्में परम्परा के नजदीक होती हैं फिर भी अभिनेत्रियों में नाभी दिखाने की होड़ देखी जाती है।



 

दक्षिण के लोग परम्पराओं को मानते हैं, लेकिन फिर भी वहां किसिंग सीन अपर नाभी प्रदर्शन दिखाना आम चलन हो गया है। इसका एक कारण यह भी है कि वहां हॉलीवुड-बॉलीवुड की तरह ग्लैमर दिखाने के अन्य हथियार नहीं है। निर्माताओं के पास विकल्प बेहद कम होते हैं और वो अपना काम बखूबी निकाल रहे हैं।

 

 

गौरतलब है कि उन फिल्मों में भी अब प्रयोग के नाम पर जो परोसने की कवायद हो रही है, वो कला के लिए ठीक नहीं है।


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