एक बेटे ने अपनी मां को अधमरा कर गंगा किनारे फेंक दिया, मरने से पहले पुलिसवाले को कही भावुक बात

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9:53 pm 5 Mar, 2017

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अगर दुनिया में आपको नि:स्वार्थ कोई प्यार करता है तो वह है आपके माता-पिता। उनके स्नेह की तुलना किसी से की ही नहीं जा सकती। माता-पिता  धरती पर भगवान का वो रूप है जो हमारा मार्गदर्शन करते हैं , हमें अच्छे बुरे की समझ बताते है। हर कठिन से कठिन परिस्थिति में हमारे साथ खड़े रहते हैं। लेकिन तब क्या जब कोई अपने इन्ही माता-पिता को बदले में सिर्फ आंसू देता हो और वही मां की आंखों का लाडला, पिता के जिगर का टुकड़ा कपूत बन जाए।

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सांकेतिक तस्वीर chlorophyllblog

“मारा तो मुझे मेरे बेटे ने ही है, लेकिन तुम भी मेरे बेटे की तरह हो। तुम्हें गंगा की सौगंध है… मेरे बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई न करना…” ये शब्द है उस मां के जिसने जाते-जाते भी अपने बेटे पर कोई आंच नहीं आने दी। एक बेटे ने अपनी मां को सिर्फ 1100 रूपए के लिए इतना मारा कि उनकी जान ही चली गई।

गंगा खादर क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 70 वर्षीय एक विधवा मां ने पति की मृत्यु हो जाने के बाद अपने इकलौते बेटे को खुद पाल पोसकर बड़ा किया। उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं की। आर्थिक स्थिति ठीक थी, यही कारण है कि इस मां ने अपने बेटे को किसी चीज की कमी नहीं होने दी। लेकिन बेटा बड़ा हुआ तो उसे नशे की बुरी लत लग गई। यही से शुरू हुआ इनके खुशहाल परिवार के तबाही का दौर।

परिवार की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ने लगी। जिस बेटे को मां की इस उम्र के पड़ाव में उनका सहारा बनना चाहिए था, वही बेटा उनकी मौत का कारण बना।



मजबूर मां ने पहले 60 बीघा जमीन बेची, फिर मकान। शराब की लत ऐसी की मां की विधवा पेंशन भी बेटे ने छीननी शुरू कर दी।

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सांकेतिक तस्वीर licdn

एक दिन ऐसे ही बेटा मां से उनकी पेंशन के पैसे मांग रहा था। इस बार मां ने देने से इनकार कर दिया। पैसे देने से मना करने को लेकर नशे में धुंध बेटे ने अपनी मां को इतना मारा कि उन्हें अधमरा गंगा के किनारे छोड़, 1100 रुपये छीनकर भाग गया।

पास के ग्रामीणों को जैसे ही एक वृद्ध महिला के गंगा किनारे घायल होने के बारे में पता चला, वह उन्हें अस्पताल ले गए। लेकिन तब तक खून काफी बह चूका था। डॉक्टर ने उनकी नाजुक हालात को देखते हुए उन्हें मेरठ रेफर किया। इस मां का अब कोई नहीं था, लिहाजा मेरठ ले जाने के लिए कोई नहीं मिला। तब अस्पताल की सूचना पर पुलिस उन्हें मेरठ लेकर गई। एम्बुलेंस में मेरठ ले जाने वक्त बार-बार यह मां पुलिसकर्मियों से अधमरी हालात में भी अपने बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने की अपील करती रहीं। मेरठ के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

जिस बेटे को लेकर कभी इस मां ने कई सपने संजोए होंगे, उसी बेटे ने अपनी इस मां की हत्या कर दी।


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