ये तस्वीरें आज की कड़वी सच्चाई हैं, आपको भी जरूर देखना चाहिए

Updated on 31 Mar, 2018 at 5:48 pm

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हमारे समाज में लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे है। उपभोक्तावाद बढ़ रहा है, लेकिन इस बदलती जीवनशैली के बीच  हमारे समाज में ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है, जो अपने असभ्य आचरण से समाज को शर्मसार कर रहे हैं। इस समाज में जहां एक ओर नारी को देवी का दर्जा देकर उसकी आराधना की जाती है, तो वहीं महिलाओं के प्रति लोगों का रवैया और उनकी सोच, हमें अक्सर शर्मिंदा करती है। आज हमने एक ऐसे समाज की रचना की है जो हमारी उदासीनता दर्शा रहा है।

रूस के जानेमाने कलाकार  वाल्डेमर कज़ाक ने समाज की इसी उदासीनता को तस्वीरों के माध्यम से बड़ी बेबाकी और खूबसूरती से दिखाया है। इसकी एक झलक हम आपके सामने पेश कर रहे हैं। उनकी बनाई हर तस्वीर में एक संदेश छिपा है। आप इन तस्वीरों को देख समझ जाएंगे कि इनका आशय क्या है, आइए देखते हैं।

 

वो उसका पिता है, या कोई और ?

 

मां, बेटी और इस व्यक्ति के हाव-भाव को देखकर क्या आपको लगता है कि यह व्यक्ति उसका पिता होगा ?

 

मिडिल क्लास फैमिली

 

आज के इस दौर में मंहगाई के साथ-साथ मिडिल क्लास फैमिली की जरूरतें भी मुंह बाए खड़ी हैं। यह चित्र मध्यमवर्गीय परिवार की कठिनाइयों को बखूबी दर्शाता है।

अमीरी का नशां

 

दौलत का नशां लोगों पर इस कदर सिर चढ़कर नाच रहा है कि इंसान अब इंसान ही नहीं समझते। समाज के मौजूदा हालात पर तंज कसती नज़र आती है यह तस्वीर।

 

भूखी नज़रें

 

भूखी नज़रों से महिलाओं को देखने वाले आप के आस-पास भी मौजूद हैं। जरा संभल कर रहें।

निशाना कहां है जनाब ?


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लोगों की मानसिकता को बखूबी दर्शाता यह चित्र मानो कह रहा है-  कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना।

ये तैयार हैं, और आप ?

 

यह मोहतरमा परोसने को  तैयार हैं, लेकिन क्या ? खाना या कुछ और ? वैसे समझदार कस्टमर्स को इशारा ही काफी है।

क्या यह वास्तविकता है?

 

क्या वास्तव में महिलाओं में दिमाग नाम की कोई चीज नहीं होती ?, खैर, हमें तो यकीन ही नहीं होता।

प्रकृति को बचाओ या मर जाओ

 

प्रकृति को बचाने का संदेश देती यह तस्वीर आपसे कह रही है कि यदि आप प्रकृति को बचाकर उसका साथ नहीं देंगे तो आपको भी प्रकृति का साथ नहीं मिलेगा।

एडिक्शन

 

तस्वीर को देख आप समझ ही गए होगें कि तस्वीर आपको क्या संदेश दे रही है।

 

मतलबी दुनिया

 

हर जगह आज अपराध पनप रहा है, फिर भी लोग आंखे मूंदे बैठे हैं। इस खुदगर्ज और मतलबी समाज में आपका स्वागत है।

 

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