स्मृति ईरानी ने ऐसी तस्वीर शेयर कर दी है, जिस पर लोग उनकी जमकर क्लास लगा रहे हैं

Updated on 26 Oct, 2018 at 5:12 pm

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बीजेपी की तेज़तर्रार नेता स्मृति ईरानी हमेशा अपने बोलने के अंदाज के कारण सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कहते हैं न ज़्यादा बोलना भी ठीक नहीं होता। इस चक्कर में कई बार आप कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिससे आपकी फ़जीहत हो जाती है। पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

 

 


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स्मृति ने हाल ही मे सबरीमाला मंदिर को लेकर जो कुछ भी कहा उसको लेकर उनकी खूब खिंचाई हुई। लोगों ने उनकी सोच को बाबा आदम के ज़माने की बताया। महिलाओं को कम से कम स्मृति से इस तरह के स्टेटमेंट की कतई उम्मीद नहीं थी।

अपने बयान में स्मृति ईरानी ने कहा था, “ये तो कॉमन सेंस है। क्या आप पीरियड के ब्लड से सना हुआ सैनिटरी नैपकिन अपने दोस्त के घर में ले जाएंगे? नहीं ले जाएंगे और क्या। आपको लगता है ऐसा हमें भगवान के घर यानी मंदिर जाते समय करना चाहिए? यही फ़र्क है और ये मेरी निजी राय भी है।” भले ही ये उनकी निजी राय हो, लेकिन वो जिस पद पर काबिज़ हैं उनके मुंह से ऐसा बयान बेहद बेतुका लगता है। अपने इसी बयान के लिए जब वो ट्रोल हुई तो बड़े ही अनोखे अंदाज़ में स्मृति मैडम ने आलोचकों को जवाब दिया।

 

इंस्टाग्राम पर स्मृति ने अपने सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की एक तस्वीर शेयर की और लिखा, “हम बोलेगा को बोलोगे कि बोलता है…।”

 

 

एक महिला होकर खुद वो पीरियड्स के दौरान एक तरह से महिलाओं को अपवित्र बता रही हैं, स्मृति जी किस जमाने में जीती हैं आप? आज के वैज्ञानिक और डिजीटल क्रांति के इस युग में कोई अनपढ़ महिला ऐसा कहे तो एक बारगी बात हज़म भी हो जाए, लेकिन कोई धुरंधर नेता वो भी महिला ऐसा कहे तो बात हज़म नहीं हो पाती।

सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल तक की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बैन को हटा दिया। बावजूद इसके मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध हो रहा है, क्योंकि पुजारियों और स्मृति जैसे कुछ लोगों को लगता है जिन महिलाओं को पीरियड होते हैं वो उस वक्त अपवित्र हो जाती हैं।

 

 

इन लोगों ने लगता है असम में मौजूद मां कामाख्या देवी के बारे में नहीं सुना है शायद। इस मशहूर मंदिर में देवी की मूर्ती की बजाय उनके प्राइवेट पार्ट की पूजा होती है और ऐसा कहा जाता है जब देवी को पीरियड होते हैं तो 4 से 5 दिनों के लिए मंदिर बंद रहता है। जब हम पीरियड वाली देवी की पूजा कर सकते हैं, तो महिलाओं को उस दौरान मंदिर जाने से रोकना कहां का न्याय और समझदारी है?


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