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स्मिता पाटिल ने चुपके से कर ली थी शादी, मौत के बाद रिलीज हुई थी 14 फिल्में!

Published on 17 October, 2017 at 1:46 pm By

बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो जाने के बाद भी लोगों के जेहन में रचे-बसे रहते हैं। ऐसी ही शख्सियत थीं बॉलीवुड एक्ट्रेस स्मिता पाटिल।

मात्र 31 साल के अपने जीवन में उन्होंने अपने को न सिर्फ बॉलीवुड में स्थापित कर लिया था, बल्कि हिन्दी सिनेमा के बड़े एक्टरों में अपना नाम शुमार कर लिया था। आइए, जानते हैं स्मिता पाटिल के बारे में ऐसे फैक्ट्स जिसके बारे में लोग कम ही जानते हैं।

स्मिता का जन्म 17 अक्टूबर, 1955 को पुणे में हुआ था। अपने छोटे फ़िल्मी करियर में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। वह अपने दौर की इतनी व्यस्त बिजी अभिनेत्री थीं कि मौत के बाद उनकी लगभग 14 फिल्में रिलीज हुई थी। स्मिता ने लिव-इन में रहने के बाद चुपके से राज बब्बर से शादी कर ली थी। दोनों का एक बेटा है प्रतीक बब्बर। बेटे के जन्म के बाद ही 13 दिसंबर, 1986 को 31 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

स्मिता उन दौर की सेंसेशन थीं।


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फिल्म के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी वे सुर्ख़ियों में रहती थीं। राज बब्बर से शादी को लेकर भी उनपर घर तोड़ने के आरोप लगे। दरअसल राज बब्बर पहले से शादीशुदा थे। उन्होंने 1975 में थिएटर आर्टिस्ट नादिरा बब्बर से शादी की थी और दोनों के दो बच्चे आर्य और जूही बब्बर थे। हालांकि, स्मिता की मृत्यु के बाद राज अपनी पहली पत्नी के पास लौट गए।

श्याम बेनेगल ने दिया था पहला मौक़ा।



फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट से ग्रैजुएशन करने के बाद स्मिता को डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने अपनी फिल्म ‘चरणदास चोर’ के लिए साइन कर लिया। ये उनकी पहली फिल्म थी। 1975 में इस फिल्म की रिलीज के साथ ही स्मिता ने बॉलीवुड डेब्यू किया। 1975 से 1985 के बीच लगभग 10 सालों में स्मिता हिंदी सिनेमा का बहुत बड़ा नाम बन गई थी। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि मौत के बाद उनकी 14 फ़िल्में रिलीज हुई थी।

वो 14 फिल्में ये रहीः

‘मिर्च मसाला’ (1987), ‘डांस-डांस’ (1987), ‘ठिकाना’ (1987), ‘सूत्रधार’ (1987), ‘इंसानियत के दुश्मन’ (1987), ‘अहसान’ (1987), ‘राही’ (1987), नजराना’ (1987), ‘आवाम’ (1987), ‘शेर शिवाजी’ (1987), ‘वारिस’ (1988), ‘हम फ़रिश्ते नहीं’ (1988), ‘आकर्षण’ (1988) और ‘गलियों के बादशाह’ (1989)।

कुछ सालों के फ़िल्मी करियर में स्मिता पाटिल ने मंथन (1977), भूमिका (1977), आक्रोश (1980), बाजार (1982), नमक हलाल (1982), अर्थ (1982), मंडी (1983), मिर्च मसाला (1985) जैसी यादगार फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बना ली थी। उस दौर के बड़े एक्टर भी स्मिता के साथ काम करने की इच्छा रखते थे।

यह भी जान लेंः


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बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाले से पहले स्मिता पाटिल फिल्मों में आने से पहले एक न्यूज रीडर थीं। वे फोटोग्राफी में भी अपनी एक अलग पहचान बना चुकी थीं। मात्र 21 साल की कम उम्र में उन्हें फिल्म ‘भूमिका’ में जबरदस्त अभिनय करने के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। स्मिता पाटिल को आर्ट फिल्मों के लिए विशेष रूप से जाना जाता था। हालांकि कमर्शियल फिल्मों में भी उन्होंने खुद को साबित किया। अमिताभ बच्चन के साथ उन्होंने ‘नमक हलाल’ और ‘शक्ति’ जैसी सुपरहिट फ़िल्में दीं। उस दौर के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ स्मिता पाटिल ने 6 सुपरहिट फ़िल्में दी।

बॉलीवुड के सुनहरे दौर की जब चर्चा की जाएगी, स्मिता पाटिल याद आएंगी।

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