ये विशेषताएं बनाती हैं छोटे शहरों की प्रेम कहानियों को ख़ास

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Updated on 8 Dec, 2015 at 3:52 pm

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बड़े-बड़े महानगरों में आप प्रेमी जोड़ों को किसी भी पब्लिक प्लेस जैसे मेट्रो, कैब, ट्रांसपोर्ट और पार्कों में साथ-साथ देख सकते हैं। लेकिन छोटे शहरों में ऐसी स्थिति आज भी दुर्लभ है। यदि ये जोड़े दिखते भी हैं तो यह घटना शहर भर में ‘सन्नाटे को चीरने वाली सनसनी’ का रूप ले लेती है।

फिर भी सच्चा इश्क तो अपनी मंजिल पा ही लेता है। ग्राउंड जीरो में फाइट कर जीतने वाले सोल्जर्स की तरह ये प्रेमी भी कुछ ख़ास तो जरूर होते हैं। और उनसे भी ख़ास होती हैं उनकी प्रेम कहानियाँ। आज हम आपको बता रहे हैं छोटे शहरों में पलने वाले लव-शव की कुछ ख़ास विशेषताएं जो इन्हें बना देती है ‘खासमख़ास’।

किसी शायर ने क्या खूब फरमाया है की “ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लो की आग का दरिया है और डूब के जाना है”। जनाब यह सिर्फ शेर नहीं है बल्कि एक हकीकत है, जिसे कमोबेश इन शहरों का हर प्रेमी जोड़ा समझता है।

इधर प्रेम का इजहार कोई टू-डेज या थ्री-डेज प्रोग्राम नहीं है, बल्कि एक अच्छी खासी टाइम टेकिंग प्रोसेस है। यदि आप इसे किसी तपस्या और योग से जोड़ दें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

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प्रेम की शुरुआत अक्सर चाट-फुल्की के कार्नरों, ट्यूशन क्लासेस और स्कूल-कालेजों से होती है, लेकिन इसमें गोपनीयता बनाए रखना एक अहम् कंडीशन है।

प्रेम की एकपक्षीय पहल की शुरुआत अक्सर “प्रेमी” ही करता है। हालांकि सक्सेज रेट बहुत कम होता है, क्योंकि इसमें रिस्क फैक्टर बहुत ज्यादा है। प्रेमिका का काम तो ससुरा सिर्फ राष्ट्रपति की तरह सहमति प्रदान करना होता है।

छोटे शहरों में प्रेमी की हालत बेहद खराब होती है और अक्सर उसे मोरल पुलिसिंग का शिकार बनना पड़ता है।



यहाँ प्रेम का डेस्टिनेशन तक पहुँचना किसी सैन्य जंग जीतने से कम है क्या ?

प्रेम का रास्ता धर्म, जाति और सोशल बैकग्राउंड के कांटों से भरा पड़ा होता है, जिससे बच कर निकलना एक टेढ़ी खीर है।

इक्का-दुक्का रेस्टोरेंट्स और पार्कों में युवा प्रेमी जोड़े दोस्तों के साथ सामूहिक मिलाप का आयोजन करते हैं। इसके पीछे का कंसेप्ट ये है की जान-पहचान और सनसनी बनाने वाले रिश्तेदार टाइप एलीमेंट्स ऐसे स्थानों पर अक्सर सक्रिय रहा करते हैं। जो वैसे भले आपको न पहचाने, पर ऐसे में जरूर पहचान लेते हैं।

सबसे बड़ी बात लव में ‘ब्रेकअप’ की प्रोबेबिलिटी बहुत ज्यादा होती है। अरे काके, जब इतने फैक्टर डिस्टर्बेंस क्रियेट करने में जुटे होते हैं तभी तो आपके प्रेम की असली परीक्षा होती है।

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