89 की हुईं ‘अभिनेत्री’ लता मंगेशकर, कई फिल्मों में छोड़ी है अपने अभिनय की छाप

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Updated on 28 Sep, 2018 at 7:18 pm

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‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर आज अपना  89वां जन्मदिन मना रही हैं। सात दशकों तक संगीत की दुनिया पर राज करने वाली लता दीदी ने अपने पूरे करियर में कई भाषाओं में गाने गाए हैं। ‘भारत रत्न’ से नवाज़ी गई लता मंगेशकर ने करीब 36 भाषाओं में 50 हजार से ज़्यादा गानों को अपनी आवाज़ से सजाया है।

 

 


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लताजी के चाहने वाले देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं। अपनी दिलकश आवाज़ से लता दीदी  ने अपने लाखों-करोड़ों फैंस बनाए हैं। आज भी उनके गाये गाने कानों में रस घोल देते हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर उन्हें बॉलीवुड सितारों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी बधाई दी।

 

हम में से ज़्यादातर लता मंगेशकर को बतौर गायिका जानते हैं, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि लता दीदी अभिनेत्री भी रह चुकीं हैं। जी हां, ये सुनकर आपको हैरानी भी हुई होगी, लेकिन ये सच है।

 

 

मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर की परवरिश महाराष्ट्र में हुई। उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे। लता दीदी ने पांच साल की उम्र से अपने पिता के साथ एक रंगमंच कलाकार के रूप में अभिनय करना शुरू कर दिया था। लेकिन उनका अभिनय सिर्फ रंगमंच तक ही सिमित नहीं था, उन्होंने कई फिल्मों में बतौर अभिनेत्री काम किया।

 

 



साल 1942 में अपना पहला गाना मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाया, लेकिन उनके पिता को लता का फिल्मों के लिए गाना पसंद नहीं आया और उन्होंने उस फिल्म से लता का गाया गीत हटवा दिया।

13 वर्ष की छोटी उम्र में ही लता के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पिता के देहांत के बाद उनका पूरा परिवार पुणे से मुंबई आ गया। यहां परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें फिल्मों में काम करना पड़ा। लता को फिल्मों में अभिनय करना जरा भी पसंद नहीं था लेकिन परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया।

 

 

वर्ष 1942 में लता दीदी ने मराठी फ़िल्म ‘पहिली मंगलगौर’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने ‘मीरा बाई’, ‘ ‘गजा भाऊ’, ‘छिमुकला संसार’, ‘बड़ी मां’, ‘जीवन यात्रा’ और ‘छत्रपति शिवाजी’ जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया।

 

Legendary singer Lata Mangeshkar

 

लेकिन उनका प्यार सिर्फ़ और सिर्फ़ संगीत था। अपने संगीत के करियर के शुरूआती दिनों में लता दीदी को कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उनकी पतली आवाज़ के कारण उन्हें कई संगीतकारों ने मना किया। 1947 में आई फिल्म ‘आपकी सेवा में’ में गाए गीत से लता को पहली बार बड़ी सफलता मिली और फिर उन्होंने पीछे पलट कर नहीं देखा।

 

 


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