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महज 13 साल की उम्र में भूपेन हजारिका ने लिखा था पहला गाना

4:05 pm 8 Sep, 2017

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गीतकार, संगीतकार और गायक भूपेन हजारिका किसी पहचान के मोहताज़ नहीं हैं। शायद ही कोई ऐसा संगीत प्रेमी हो जिसने उनके गाने ‘दिल हूम हूम करे’ और ‘ओ गंगा तू बहती है क्यों’ नहीं सुने हों। भूपने हजारिका आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ की कशिश आज भी उनके चाहने वालों के जेहन में ताज़ा है।

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सिंतबर 1926 को असम में हुआ था। वह 10 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। अपनी मां को देखकर उन्हें गाने की प्रेरणा मिली। उनका बचपन गुवा‌हाटी में ही बीता। 10 साल की उम्र में ही वो असमिया भाषा में गाने लगे थे। फिल्ममेकर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें बहुत पसंद आई। वे वर्ष 1936 के दिन थे जब कोलकाता में भूपेन ने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था।

13 साल की उम्र में हजारिका ने अपना पहला गाना लिखा था। यहीं से उनके सिंगर, कंपोजर और लिरिसिस्ट बनने का सफर शुरू हो गया ‌था। पढ़ाई पूरी होने के बाद हजारिका ने गुवाहाटी में ऑल इंडिया रेडियो में गाना शुरू कर दिया। इसके साथ हजारिका बंगाली गानों का हिंदी में ट्रांसलेट कर उसे अपनी आवाज देते थे। वह कई भाषाओं के जानकार थे।


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समय बीतने के साथ वो स्टेज परफॉर्मेंस भी देने लगे। एक बार वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी गए। यहां उनकी मुलाकात प्रियम्वदा पटेल से हुई। दोनों में प्यार हुआ और अमेरिका में ही वर्ष 1950 में दोनों ने शादी कर ली। वर्ष 1953 में हजारिका अपने परिवार के साथ भारत लौट आए, लेकिन दोनों ज्यादा समय तक साथ नहीं रह पाए। भारत आकर हजारिका ने गुवाहाटी यूनिवसिर्टी में टीचर की नौकरी कर ली।

बहुत समय तक वह टीचर की नौकरी भी नहीं कर सके और इस्तीफा दे दिया। पैसों की तंगी की वजह से उनकी पत्नी प्रियंबदा ने उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद हजारिका ने म्युजिक को ही अपना साथी बना लिया। उन्होंने रुदाली, मिल गई मंजिल मुझे, साज, दरमियां, गजगामिनी, दमन और क्यों जैसी सुपरहिट फिल्मों में संगीत दिए। हजारिका ने अपने जीवन में एक हजार गाने और 15 किताबें लिखीं।

म्युजिक के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1975 में राष्ट्रीय पुरस्कार, वर्ष 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें वर्, 2009 में असोम रत्न और इसी साल संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 2011 में पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे बड़े पुल का भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया।भूपेन हजारिका का वर्ष 2011 में निधन हो गया।

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