सिंगापुर में अगले साल से कोई नई कार नहीं खरीद सकेगा

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Updated on 26 Oct, 2017 at 3:30 pm

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सिंगापुर में अगले साल के फरवरी महीने कोई भी व्यक्ति नया कार नहीं खरीद सकेगा। सिंगापुर की सरकार ने फैसला किया है कि अगले से निजी वाहनों की संख्या ‘फ्रीज’ कर दी जाएगी और इसके बादले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा।

फरवरी 2018 के बाद सिंगापुर में अगर कोई व्यक्ति अपना प्राइवेट वाहन खरीदना चाहेगा तो उसे पात्रता प्रमाणपत्र लेना होगा, जिसकी कीमत 2.40 लाख रुपए होगी। ‘द लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ द्वारा जारी यह प्रमाण पत्र महज 10 साल के लिए ही वैध होगा। यही वजह है कि प्राइवेट गाड़ियों के मामले में सिंगापुर दुनिया के सबसे महंगे शहरों में शामिल हो गया है।

सिंगापुर की आबादी 56 लाख है और शहर में वर्ष 2016 तक छह लाख निजी कारें थीं।

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सरकार की योजना पब्लिक ट्रान्सपोर्ट को बढ़ावा देने की है, लेकिन निजी वाहनों की संख्या कम करने की कोई सीमा फिलहाल नहीं तय की गई है। अगले पांच साल में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अपग्रेड कर आमूल चूल परिवर्तन किए जाने की योजना है।

यह होगा असर



अब सिंगापुर में टोयोटा कोरोला ऑल्टिस 53 लाख रुपए में मिलेगी। यानी यह गाड़ी सिंगापुर के लोगों को अमेरिका की तुलना में चार गुनी महंगी मिलेगी।

‘द लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी’ का कहना है कि पिछले छह साल में सिंगापुर में रेल नेटवर्क का 30 फीसदी विकास किया गया है। इसमें 41 नए स्टेशंस जोड़े गए हैं। बस सर्विस आधुनिकीकरण योजना के तहत 1 बिलियन डॉलर का निवेश किया गया है। अगले पांच साल में सिंगापुर सरकार की योजना 20 बिलियन डॉलर नए रेल नेटवर्क पर खर्च करने की है, जबकि 4 बिलियन डॉलर पुराने रेल नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए रखा गया है। वहीं, अन्य 4 बिलियन डॉलर से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का विकास किया जाएगा।

सिंगापुर में लोगों को सड़कों पर लंबे जाम से छुटकारा मिल जाएगा। संभवतः विकास यही है।

भारत को क्या सीख लेनी चाहिए?

कुछ लोग कह सकते हैं कि भारत की तुलना में सिंगापुर बहुत छोटा है, जबकि हमें लगता है कि विकास का यह मॉडल उचित है। भारत पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए किसी भी सरकार ने ईमानदारी से काम नहीं किया है। हालांकि, अब केन्द्र सरकार का कहना है कि वर्ष 2030 से देश में सिर्फ इलेक्ट्रिक कार बिकेगी। सिंगापुर मॉडल को अपनाते हुए सरकार को चाहिए कि प्राइवेट वाहनों पर लगाम लगाए और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को चुस्त-दुरूस्त करे। इससे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में सड़क जाम से निपटने में सहूलियत होगी।


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