बिहार की राजनीति में उठापटक के संकेत, क्या नरेन्द्र मोदी के साथ जाएंगे नीतीश कुमार ?

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Updated on 11 Jan, 2017 at 11:51 am

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बिहार की राजनीति में उठापटक के संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केन्द्र सरकार के विरोध में आयोजित होने वाली एक प्रमुख रैली में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। आगामी 28 जनवरी को ‘मोदी हराओ, देश बचाओ’ रैली का आयोजन गुजरात में हार्दिक पटेल के नेतृत्व में किया जाना है।

हार्दिक ने नीतीश से मिलकर उन्हें इस रैली में शामिल होने का न्यौता दिया था।

मुलाकात के दौरान नीतीश ने हार्दिक को रैली में शामिल होने पर सहमति दी थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के चुनावों में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए उन्होंने इस रैली में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। नीतीश कुमार के इस निर्णय से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ बढ़ रही नजदीकियों की वजह से नीतिश केन्द्र सरकार विरोधी गतिविधियों में भाग नहीं लेना चाहते।

गौरतलब है कि हाल ही में पटना में आयोजित प्रकाश पर्व उत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की थी। उन्होंने राज्य सरकार के शराबबंदी अभियान को सफल बताया और इसकी सराहना की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण से पहले नीतीश कुमार ने भी गुजरात के शराबबंदी अभियान की ताऱीफ की थी।

नीतीश कुमार इकलौते ऐसे विपक्षी नेता हैं, जिन्होंने न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी अभियान की तारीफ की है, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में हुए भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ की थी।

इस बीच, जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने भाजपा के साथ बढ़ रही नजदीकियों से इन्कार किया है। उन्होंने कहा कि हार्दिक पटेल से कहा गया है कि अगर वह 11 मार्च के बाद किसी रैली का आयोजन करते हैं तो उसमें मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि 11 मार्च को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम सामने आने हैं।


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