महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

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8:22 pm 19 Aug, 2015

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महा शिवरात्रि हिन्दुओं का महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह उन गिने-चुने त्यौहारों में है, जिसे पूरे भारतवरर्ष में एक साथ मनाते हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन का व्रत रखती हैं और रात में जब तक भगवान शिव की पूजा न हो जाए, तब तक अन्न-जल ग्रहण नहीं करतीं। इतना तो हमें पता है, लेकिन इस पर्व की कुछ अन्य बारीकियां भी हैं, जिससे हम अनभिज्ञ हैं।

 

Deccan Chronicle

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1. विल्व पत्र का महत्व

मान्यताओं के भगवान की शिव की पूजा विल्व पत्रों (बेल वृक्ष के पत्ते) के बिना नहीं हो सकती। ये विल्व पत्र तीन-तीन के समूहों में होते हैं, जो तीन नाड़ियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इन्हें अंज चक्र कहा जाता है। समझा जाता है कि कोई भी व्यक्ति अगर इस स्तर पर आकर ध्यान केन्द्रित करे तो वह मोक्ष के मार्ग पर आगे ही बढ़ता जाता है।

यही वजह है कि शिव के पूजन का अपना एक अलग महत्व है।

2. रात्रि जागरण

मान्यता है कि इस दिन जो लोग शिव की अराधना करते हैं, उन्हें पूरी रात जाग कर बिताना चाहिए।

इस तरह की प्रथा अनायास ही नहीं है, बल्कि इसका एक आधार है।

 

हिन्दू धर्म की मान्यताओं में इस बात का जिक्र है कि जागते रहने से एक तरह की जागरूकता और दृढ़ संकल्प की सृष्टि होती है जो जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक है।

3. तांडव

हमें भगवान शिव के तांडव नृत्य के बारे में पता है। लेकिन हम यह नहीं जानते कि इसका उद्देश्य नश्वर प्राणी मात्र को देवत्व की तरफ आकर्षित करना है।

 

नश्वर और देवत्व के मिलन से एक नए दृष्टिकोण का जन्म होता है। पवित्र आत्मा और नए दृढ-संकल्प के साथ सांसांरिक चुनौतियों का सामना करने के लिए आप एक बार फिर तैयार होते हैं।

 



माना जाता है कि इस दिन पुरुष और प्रकृति एक-दूसरे के नजदीक आते हैं और मिल-कर एक हो जाते हैं।

4. व्रत का महत्व

भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि वह देवताओं में सबसे अधिक जानकार हैं। महा शिवरात्रि के अवसर पर व्रत का विधान इससे जुड़ा हुआ है।

 

हिन्दू धर्म के मान्यताओं के मुताबिक व्रत के माध्यम से ही कोई भी व्यक्ति देवत्व के करीब पहुंचता है। और जहां तक जागरण (रात भर जागने) की बात है तो इसका तात्पर्य काम-क्रोध-लोभ-मोह की गहरी निद्रा से जागने को लेकर है।

5. रात्रि का महत्व

महा शिवरात्रि तम का पर्व है, जहां चन्द्रमा की अराधना की जाती है। चन्द्रमा मन-मस्तिष्क का प्रतीक है। मान्यता है कि चन्द्रमा 16 दिन की यात्रा के पश्चात अपनी ऊर्जा का 1/6 भाग ही बचा पाता है। मनुष्य का मन भौतिकताओं से भरा हुआ है।

 

चन्द्रमा के सदृश भौतिकताओं से दूर जाने पर बल दिया गया है। महा शिवरात्रि के अवसर पर भगवान भोले नाथ की अराधना करने वालों का एक तरह से पुनर्जीवन होता, जिससे उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की ऊर्जा मिलती है।

6. शिवः एक महान चेतना

भारतीय मान्यताओं में शिव को एक महा शक्तिशाली देवता कहा गया है। वह तीन चरणों गहरी निद्रा, जागृत और स्वप्न को अलंकृत करते हैं।

 

शिवलिंग पर विल्व पत्रों के साथ जल या दूध अर्पित करने से भक्तों की भावनाएं पवित्र होती हैं। उनमें भक्ति का उत्थान होता है और यह एक नए स्तर तक पहुंचता है। महा शिवरात्रि के बाद वाली सुबह एक आध्यात्मि जागृति की सुबह होती है, जो व्यक्ति विशेष को अपना कर्म करने में मदद करती है। यह गहरी निद्रा से जागना होता है।

 

आपको महा शिवरात्रि की ढेर सारी शुभकामनाएं।

 


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