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भारतीय रणबांकुरों की शौर्य और पराक्रम की गाथा है ‘ऑपरेशन मेघदूत’

Updated on 13 April, 2017 at 3:23 pm By

सियाचिन एक ऐसी जगह है, जहां चारों तरफ बर्फ ही बर्फ नजर आती है। यह एक ऐसी जगह जहां ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम है। यहां दिन का तापमान शून्य से 40 डिग्री नीचे, तो वहीं रात का तापमान माइनस 70 डिग्री तक चला जाता है।

विकट परिस्थितियों में भी हमारे देश के जवान तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में अपनी मातृभूमि की रक्षा की खातिर सीना ताने डटे रहते हैं।

सियाचिन में भारतीय जवानों की किलेबंदी इतनी सबल है कि पाकिस्तान से कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इसका मुख्य कारण हैं भारतीय सेना द्वारा वर्ष 1984 में चलाया गया ‘ऑपेरशन मेघदूत’। इस अभियान को सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जे के लिए उसी साल 13 अप्रैल को शुरू किया गया था।

13 अप्रैल को करीब 300 भारतीय जवानों ने ग्लेशियर की अहम चोटियों और दर्रों पर अपनी पोजीशन संभाली। दुनिया के सबसे ऊंचे मैदान-ए-जंग में भारत-पाकिस्तान के बीच सीधे टकराव की यह पहली घटना थी।



80 के दशक में पाकिस्तान ने सियाचिन पर अपने कब्जे की रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। वहीं, 1982 में भारत ने भी अपने जवानों को अंटार्कटिक भेजना शुरू  कर दिया था।

पाकिस्तान 17 अप्रैल से सियाचिन पर अपने कब्जे का अभियान शुरू करने वाला था। जैसे ही भारत को पाकिस्तान के नापाक इरादों की भनक लगी, भारत ने 13 अप्रैल 1984 को सियाचिन पर कब्जा करने के लिए ‘ऑपरेशन मेघदूत’ शुरू कर दिया।


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दरअसल, जुलाई 1949 के कराची समझौते और 1972 के शिमला समझौते में दोनों देशों के बीच सरहद को लेकर कुछ साफ़ नहीं था। इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव शुरू हो गया।

‘ऑपरेशन मेघदूत’ के तहत भारतीय जवान MI-17, MI-8, चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों के जरिए ग्लेशियर की ऐसी दुर्गम चोटियों तक पहुंचे, जहां पर पहले कभी इंसान के कदम तक नहीं पड़े थे। यह ऑपरेशन वाकई आसान नहीं था।

भारत ने अपने इस ऑपरेशन की शुरुआत पाकिस्तान से 4 दिन पहले ही कर दी थी, जिससे पाकिस्तान भी भौचक्का रह गया था। दुश्मन देश को यहां मुंह की खानी पड़ी थी।

जब पाकिस्तानी सेना इन दुर्गम इलाकों तक पहुंची, तो उन्होंने पाया कि भारतीय जवान पहले से ही सियाचिन, सलतोरो ग्लेशियर और तीन प्रमुख दर्रों सिया ला, बिलाफोंद, और म्योंग ला पर पहले से ही कब्जा जमाए बैठे हैं।

तब से लेकर अब तक भारतीय जवान सियाचिन जैसे दुर्गम इलाके में हर तरह की मुश्किल का सामना करते हुए डटे हुए हैं।

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