उफनती गंगा में तैरकर कानपुर से वाराणसी जाएगी 11 साल की श्रद्धा

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Updated on 29 Aug, 2016 at 11:50 pm

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नन्हीं जलपरी के नाम से मशहूर उफनती गंगा में तैरकर रिकॉर्ड बनाने वाली कानपूर की श्रद्धा शुक्ला एक नए रिकॉर्ड बनाने की ओर निकली है। इस बार 11 साल की श्रद्धा गंगा नदी में तैरकर कानपुर से वाराणसी तक जाएगी।

कानपुर की यह जलपरी अपने इस लक्ष्य को पाने हेतु 28 अगस्त को कानपुर में गंगा में उतर चुकी है। पूर्व मंत्री राजपाल कश्यप ने कानपुर में तिरंगा झंडा दिखाकर श्रद्धा को गंगा के सफर पर रवाना किया।

कानपुर से वाराणसी तक गंगा की दूरी तकरीबन साढ़े पांच सौ किलोमीटर है। कुल करीब पांच सौ किलोमीटर की ये दूरी श्रद्धा के दस दिनों में तय करने का अनुमान है।

इस मिशन में श्रद्धा की सुरक्षा के लिए उसके साथ पिता ललित शुक्ला, 10 गोताखोर, एक डॉक्टर और कुछ अन्य लोग श्रद्धा के साथ ही रहेंगे।गोताखोर 5-5 के समूह में श्रद्धा की सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।

श्रद्धा का ये मिशन इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि इस वक्त भारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है। इस लिहाज से श्रद्धा का गंगा में तैरकर इतनी लंबी दूरी तय करना खतरे से खाली नहीं है।

गंगा में तैराकी के दौरान श्रद्धा के साथ नाव पर पूरी टीम है, जिसमें लाइफ गार्ड से लेकर खाने पानी तक की व्यवस्था की गई है।

श्रद्धा ने इलाहबाद तक जाने के लिए तैराकी को 4 भागों में विभाजित किया है, जिसके तहत वह गंगा में प्रतिदिन 100 किलोमीटर का सफर तय करेगी।

अपने इस सफर के दौरान श्रद्धा रात के समय चार जगहों चण्डिका देवी बक्सर उन्नाव, फतेहपुर, कौशाम्बी और इलाहबाद पर रुकेगी।


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इससे पहले श्रद्धा ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही कानपुर से इलाहाबाद की 270 किमी की दूरी तय की थी।

श्रद्धा को बचपन से ही तैराकी का शौक रहा है। श्रद्धा के पिता ललित कुमार बताते है कि करीब ढाई साल की उम्र से ही श्रद्धा ने गंगा की लहरों के बीच खेलना शुरू कर दिया था। वह अपने दादा के साथ तैराकी के लिए जाती थी। ऐसे ही चार साल की उम्र तक आते-आते श्रद्धा एक कुशल तैराक बन गई।

अब श्रद्धा का सपना है कि वह ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर आए।

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