शिरडी के साईं बाबा की असली और दुर्लभ तस्वीरें आई सामने, 100 साल पहले ऐसे दिखते थे बाबा

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Updated on 27 Aug, 2016 at 12:53 pm

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‘जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का।’

इस पंक्ति में साईं बाबा कहते हैं:

“जो व्यक्ति मुझे जिस भाव से देखता है, मैं उसे वैसा ही दिखता हूं। यही नहीं, जिस भाव से कामना करता है, उसी भाव से मैं उसकी कामना पूर्ण करता हूं।”


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साईं नाम की महिमा अपरम्पार है, जो भी शिरडी जाता है, साईं का ही होकर रह जाता है। साईं बाबा के लिए कहा जाता है कि उन्होंने अपने भक्तों को अपनी मृत्यु का संकेत पहले ही दे दिया था। बाबा का जन्म कब हुआ यह एक गुत्थी ही है।

साईं बाबा ने अपना पूरा जीवन जनसेवा में ही व्यतीत किया। वह हर पल दूसरों के दुख दर्द दूर करते रहे। रूखी-सूखी रोटी जैसी मिलती थी, उसको खाकर अपना जीवन व्यतीत करते थे।

माना जाता है कि 22 अक्टूबर को शिरडी के साईं बाबा का निर्वाण दिवस था। 1918 में दशहरा के ही दिन उन्होंने अंतिम सांस ली थी। शिरडी के साईं बाबा का निधन 15 अक्टूबर 1918 (दशहरा के दिन) हुआ था।

शिरडी के साईं बाबा के भक्त देश में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में फैले हुए हैं। उनके फकीर स्वभाव और चमत्कारों की कई कथाएं है। आज हम आपसे साईं बाबा की करीबन 100 साल से अधिक पुरानी तस्वीरें साझा करने जा रहे है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किसने ये तस्वीरें ली हैं।

द्वारिका माई की बताई जाती है बाबा की यह तस्वीर।

द्वारिका माई में अपने शिष्यों के साथ, एक बच्चे को दुलार करते बाबा।

बाबा अपने प्रिय शिष्य हेमांडपंत और म्हालसापति व अन्य के साथ।

शिरडी के एक बाजार में बाबा।

विचार-विमर्श करते हुए साईं बाबा और उनके भक्त गण।

बाबा के निधन से कुछ महीने पहले की तस्वीर।

शांत शैली में साईं बाबा।

शिरडी में द्वारिका माई के चबूतरे पर बैठे बाबा।

शिरडी में चावड़ी के सामने बैठे बाबा।

शिरडी में द्वारका माई में अपने शिष्यों के साथ बैठे साईं बाबा।

जानवरों को स्नेह करते बाबा।

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