भारी बर्फ़बारी के बीच लोग बेज़ुबानों को अपने घरों और दुकानों में दे रहे हैं जगह

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Updated on 19 Jan, 2017 at 10:10 pm

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साल 2016 का यह दुर्भाग्य ही कहिए कि हम पूरे साल इंसानियत ढूंढते रह गए। हर तरफ़ से बुरी ख़बरें, दिल तोड़ देने वाली ख़बरे। हम साल 2016 मे यह सवाल ज़ेहन में दोहराते रह गए कि आख़िर इंसानियत कहीं गुम हो गयी है क्या? पर 2017 बिलकुल ऐसा नहीं है। दरअसल, यह उम्मीदों का साल है।

अभी हाल ही में तुर्की के इस्तांबुल शहर में भारी बर्फ़बारी हुई। यह तूफ़ान 2009 से अब तक का सबसे बड़ा तूफ़ान बताया जा रहा था। पर एक ऐसे वक़्त में जब मौसम सर्द था, लोगों के जज़्बात सर्द नहीं हुए। उन्होंने गर्मजोशी से सड़क के जानवरों को अपने घरों और दुकानों में जगह दी।

ये तस्वीरें उम्मीद हैं। वह उम्मीद जो हमें बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करती हैं। इन तस्वीरों में सिर्फ़ वहां के हालात ही क़ैद नहीं हुए, बल्कि वहां के लोगों की इंसानियत भी क़ैद हुई।


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इस्तांबुल शहर अब भी बर्फ से ढका है। हालात गंभीर हैं, पर इसी बर्फ़बारी में हमने वो मानवता और इंसानियत भी ढूंढ निकाला, जिसे हमने पिछले साल कहीं खो दिया था। इस तूफान से हुए भारी नुकसान के भी बीच लोगों ने दुकानों में यहां तक कि बड़े-बड़े मॉल में भी इन मासूम, बेज़ुबान और बेघर जानवरों को पनाह दी।



homeless stary

 

हमारा इंसान होना इसी बात पर निर्भर करता है कि हम अन्य जीवों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यह कहानी छोटी सी ज़रूर है, पर निश्चित रूप से बीते साल के दुःखद पलों पर मरहम लगाने का कार्य करेगी। आशा करते हैं कि यह साल हमें संवेदनशील बनाएगी। मानव जाति फिर एक बार एक दुसरे का हाथ पकड़े  इंसानियत के गीत गाएगी।

चित्र साभार: वूमेन डेली मॅगज़ीन


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