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शशि कपूर के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटे जाने का यह था कारण, मिली थी शस्त्र सलामी

Published on 9 December, 2017 at 11:20 am By

70 और 80 के दशक में रुपहले पर्दे पर अपनी रूमानी अदाओं से लोगों को दीवाना बना देने वाले दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता शशि कपूर ने 4 दिसंबर 2017 को 79 साल की उम्र में कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली।


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वह कई वर्षों से बीमार चल रहे थे। शशि कपूर का अंतिम संस्कार मुंबई में सांता क्रूज पुलिस स्टेशन के नजदीक स्थित सांताक्रूज हिंदू श्मसान में किया गया।

 

बारिश की फुहारों और उनके चाहने वालों ने आंसुओं की नमी के साथ हिंदी सिनेमा के इस रोमांटिक हीरो को राजकीय सम्मान के साथ भावभीनी विदाई दी।

 

 

उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ था। शशि कपूर का शव जब श्मशान पहुंचा, वहां मौजूद मुंबई पुलिस ने पारंपरिक तरीके से पार्थिव शरीर से तिरंगे को अलग किया। इसके बाद पुलिस की एक टुकड़ी ने उन्हें तीन राउंड फायरिंग कर आख़िरी सलामी दी।


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मौके पर मौजूद लोगों ने एक मिनट का मौन कर शशि को कपूर श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार के वक्त बारिश के बावजूद भी हजारों की संख्या में शशि के प्रशंसक वहां मौजूद थे।

 

अब ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि शशि कपूर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई क्यों दी गई। दरअसल, भारत में राजकीय सम्मान वर्तमान और पूर्व राष्ट्र पति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों को दिया जाता है।

 

शशि कपूर न तो कोई नेता थे और न ही राजनीति से जुड़े किसी पद पर काबिज थे, इसके बावजूद उन्हें ये सम्मान मिला।



 

 

यहां आपको बता दें कि केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार देश के किसी भी सम्मानित नागरिक को राजकीय सम्मान दिला सकने का अधिकार रखती है।

 

दरअसल, शशि कपूर को पद्म भूषण मिला था, ऐसे में उन्हें राजकीय सम्मान दिए जाने का निर्णय लिया गया।

 

 

देश के नागरिक सम्मान (भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म भूषण) पाने वाले व्यक्ति को भी ये सम्मान दिया जा सकता है। वहीं राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भी इस सम्मान के हकदार हो सकते हैं।

इसके लिए केंद्र या राज्य सरकार से सिफारिश करनी होती है। फिर राज्य का मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल सदस्यों से विचार विमर्श करके अपना निर्णय लेता है। एक बार राजकीय सम्मान का फैसला ले लिया जाए तो राज्य के डीजीपी और पुलिस कमिश्नर तक ये आदेश पहुंचाया जाता है और फिर जाकर राजकीय सम्मान की तैयारियां की जाती हैं।

 

गौरतलब है कि शशि कपूर ने हिन्दी सिनेमा की160 फिल्मों (148 हिंदी और 12 अंग्रेजी) में काम किया। उनका जन्म 18 मार्च 1938 को कोलकाता में हुआ था। 60 और 70 के दशक में उन्होंने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई हिट फिल्में दी।

साल 2011 में शशि कपूर को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 2015 में उन्हें दादा साहेब पुरस्कार भी मिल चुका था। कपूर खानदान के वो ऐसे तीसरे शख्स थे जिन्हें ये सम्मान हासिल हुआ था।


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