पश्चिम बंगाल में शार्क मछलियों पर आफत, इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी

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Updated on 12 Apr, 2017 at 7:12 pm

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पश्चिम बंगाल में इन दिनों शार्क मछलियों पर आफत मंडरा रही है। दरअसल, डॉग शार्क, ग्रे बैंबू शार्क, वाइट शार्क और काऊ ट्रेल शार्क जैसी मछलियों का स्वाद लोगों को बेहद भा रहा है और मछुआरों अधिक से अधिक शार्क का शिकार कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट में डॉग शार्क, ग्रे बैंबू शार्क, वाइट शार्क और काऊ ट्रेल शार्क के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि लोग शार्क मछली का स्वाद पसंद कर रहे हैं यह इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी है। शार्क को लुप्तप्राय मछलियों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

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कोलकाता के रेस्तरां में शार्क मछली से लेकर ऑक्टोपस तक परोसा जा रहा है।

आम तौर पर माना जाता है कि बांग्लाभाषी लोग मछली पसंद करते हैं, लेकिन शार्क के व्यंजन यहां लोकप्रिय नहीं थे। लेकिन अब शहर के कई मशहूर रेस्तरां में सिर्फ शार्क ही नहीं, बल्कि ऑक्टोपस तक परोसे जा रहे हैं। यही नहीं, पश्चिम बंगाल में शार्क और ऑक्टोपस का शिकार कर हॉन्ग कॉन्ग, चीन और मलयेशिया के बाजारों में भेजा जाता है, जहां के लोग अलग-अलग तरह शार्क डिश के शौकीन हैं।

महंगी है शार्क मछलियां

शार्क मछली का मांस 160 रुपए से 230 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से मिलता है। वहीं इस मांस को सुखा कर भी बेचा जाता है, जिसकी कीमत 400 रुपए से 500 रुपए प्रति किलो होती है। शार्क के जबड़े का एक दांत भी कम से कम 400 रुपए में मिलता है।

पश्चिम बंगाल के अलग-अलग फिश लैन्डिंग सेन्टर पर मछुआरे प्रतिदिन सैकड़ों शार्क मछलियों का शिकार करते हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि इन मछुआरों को पता नहीं है कि शार्क की कौन सी किस्में लुप्तप्राय जानवरों की सूची में शामिल हैं। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर शार्क का शिकार नियमित तौर पर हो रहा है।

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