शाहरुख़ ने पूरी की हॉफ सेंचुरी, कायम है किंग खान का दबदबा

author image
Updated on 2 Nov, 2015 at 1:19 pm

Advertisement


कभी-कभी शब्द कम पड़ जाते है, तो कभी पहले से ही इतने अल्फ़ाज़ कहे जा चुके होते है कि समझ में नहीं आता शुरुआत कहा से की जाए। करोड़ों दिलों के बादशाह, किंग खान आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे है। देश से लेकर विदेश तक उनके दीवानों की संख्या कम नहीं है। छोटे पर्दे से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने वाले शाहरुख़ आज बड़े पर्दे के बादशाह है। यह सफर तय कर पाना शाहरुख़ के लिए इतना आसान नहीं था। लेकिन उन्होंने न केवल इस सफर को तय किया, बल्कि किंग ऑफ़ बॉलीवुड बनकर पूरी दुनिया पर छा गए। उनकी ज़िन्दगी के सफर से जुडी कुछ खास बातें आज हम आपको बताने जा रहे है।

शाहरुख़ का जन्म साधारण मध्यम वर्ग परिवार में हुआ। वह किसी फ़िल्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक नहीं रखते, इसके बावजूद मायानगरी में उन्होंने अपने हुनर के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई।

शाहरुख़ ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह पढ़ाई, आर्ट्स गतिविधियों और खेल-खुद में अव्वल रहे।शाहरुख़ ने हंसराज कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। बाद में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएशन किया।


Advertisement

शाहरुख़ ने एक्टिंग की तालीम प्रसिद्द थिएटर डायरेक्टर बैरी जॉन से दिल्ली के थियेटर एक्शन ग्रुप में ली। 2009 में बैरी जॉन ने शाहरुख़ के बारे में कहा था-

“शाहरूख़ के करियर की असाधारण सफलता का सारा श्रेय खुद उन्ही को जाता है।”

शाहरुख़ ने छोटे पर्दे से 1988 में दूरदर्शन के धारावाहिक “फ़ौजी” से अपना डेब्यू किया, जिसमे उन्होंने कमांडो अभिमन्यु का किरदार निभाया। अपने इस किरदार के ज़रिए शाहरुख़ लोगों के दिलों में घर कर गए। इसके बाद कई और धारावाहिकों में शाहरुख़ ने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा, उनमें से एक था ‘सर्कस’।

अपने माता, पिता की मृत्यु के बाद 1990 में शाहरुख़ एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में दिल्ली से मुंबई आए।



शाहरुख़ ने फिल्म ‘दीवाना’ से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की और अब देखिए पूरी दुनिया उनकी दीवानी है। शाहरुख़ को अपनी इस फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित(डेब्यूटेंट) पुरस्कार मिला।

शाहरुख़ ने कई फिल्मों में नकारात्मक किरदार भी निभाए। ‘बाज़ीगर’ फिल्म के लिए उन्हें अपना पहला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार हासिल हुआ। फिल्म ‘अंजाम’ के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरूस्कार मिला। जहाँ एक तरफ शाहरुख़  ‘बाज़ीगर’, ‘अंजाम’ और ‘डर’ जैसी फिल्मों में नकारात्मक किरदार निभाकर वाहवाही बटोर रहे थे, तो वहीं 1995 में आई फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ उनके करियर का मील-पत्थर साबित हुई। यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे कामयाब और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है।

21 अक्टूबर, 1991 को शाहरुख़, गौरी के साथ शादी के बंधन में बंध गए। शाहरुख और गौरी की लव-स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक रूढ़िवादी सोच को दरकिनार करते हुए अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाले शाहरुख और गौरी ने एक-दूसरे का हाथ थामा, और आज यह जोड़ी औरों के लिए मिसाल है।

शाहरुख़ कई सामाजिक अभियानों से भी जुड़े हुए है। खासतौर पर एड्स, कैंसर और बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता अभियानों से शाहरुख़ जुड़े है और कई चैरिटी शोज भी इसे लेकर करते आए है।

shahrukh charity shows

ibnlive


Advertisement
चाहे वो नब्बे का दशक हो या आज का शाहरुख़ की किस्मत उनपर मेहरबान है, और वैसे भी किस्मत उनपर ही मेहरबान होती है जो पहले खुद अपनी किस्मत को लिखने का दम रखते हो। शाहरुख़ का दबदबा आज भी बॉलीवुड में कायम है। उन पर ये दो पंक्तियाँ बिल्कूल सही बैठती है: 
उम्र का तकाज़ा उन पर होगा, हम पर नहीं।
हम तो वो है जो मुर्झे हुए फूल को खिला दें।।

आपके विचार


  • Advertisement