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17 साल की उम्र में हुईं थीं वेश्यावृति की शिकार, आज हैं बॉलीवुड की जानी-मानी हस्ती

Published on 14 April, 2018 at 7:13 pm By

हिंदी सिनेमा के कई ऐसे दिग्गज कलाकार हैं, जिनके फर्श से अर्श पर पहुंचने के दिलचस्प किस्से आपने सुने होंगे। ऐसे बहुत से कलाकारों का जीवन न जाने कितने ही संघर्षों से गुजरा। लेकिन आज वो सातवें आसमान के सितारे बन चुके हैं। इन फिल्मी सितारों ने अपने फिल्मी करियर के दौरान कई बेहतरीन फिल्में देकर वो समा बांधा कि लोग उनके मुरीद हो गए।


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आज हम जिस शख्सियत का जिक्र करने जा रहे हैं उनकी कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। हम बात कर रहें हैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी राइटर शगुफ्ता रफीक की।

फिल्म इंडस्ट्री के परदे के पीछे का ये वो नाम है जिनका जीवन काफी संघर्षमय रहा। उनके निजी जीवन में कुछ ऐसा घट चुका है, जो बेहद चौंकाने वाला है। उनकी जिंदगी से जुड़ी कई ऐसी कड़वी सच्चाइयां हैं, जिसे शायद कम ही लोग जानते हैं। कई बड़ी फिल्मों का हिस्सा रह चुकी शगुफ्ता के संघर्ष की कहानी बहुत दर्द भरी है।

 

 

शगुफ्ता पचास के दशक में हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री रहीं अनवरी बेगम की गोद ली हुई बेटी हैं। शगुफ्ता अनाथ थीं और उन्हें अनवरी बेगम ने पाला। सब कुछ सही चल ही रहा था कि अचानक अनवरी बेगम की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी। उन्हें अपना घर खर्च चलाने के लिए अपनी चूड़ियां तक बेचनी पड़ीं।

ऐसे में शगुफ्ता ने भी किसी भी तरह अपनी मां का सहारा बनते हुए प्राइवेट पार्टियों में नाचना शुरु कर दिया। यह आम पार्टियां नहीं हुआ करती थी, बल्कि यहां कई बड़े-बड़े लोग आते थे और नाचती डांसरों पर पैसों की बरसात करते थे। पैसे देख शगुफ्ता बेहद खुश हुआ करती थीं कि कम से कम अब उनकी मां को दर-दर कि ठोकरे नहीं खानी होगी। फिर वह कब एक बार डांसर से वेश्यावृति की ओर बढ़ चली उन्हें खुद इस बात का पता नहीं लगा।


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57 वर्षीय शगुफ्ता ने अपने जीवन में कई विकट परिस्थितियों का सामना किया। अपने जीवन से जुड़े एक दुखद अनुभव को बयां करते हुए वो बतातीं है कि 17 साल की उम्र में वह प्रॉस्टिट्यूट बन गई थी। इस दौरान उन्होंने कई मर्दों के साथ शारीरिक संबंध बनाए।



 

मर्दों के पास जाने का ये सिलसिला काफी लंबे समय तक जारी रहा। इस दुखद अनुभव को साझा करते हुए वह कहतीं है कि उन्होंने अपनी वर्जिनीटी को किसी अनजान शख्स के साथ पहली बार खोया था। 17 से 27 की उम्र तक वो प्रॉस्टिट्यूशन में लिप्त रहीं।

 

 

इसके बाद शगुफ्ता की जिंदगी का सुनहरा दौर तब आया जब उनकी मुलाकात महेश भट्ट से हुई। वह महेश भट के संपर्क में आईं और बतौर असिस्टेंट डायेरक्टर महेश भट्ट के लिए काम करने लगीं। कुछ समय बाद उन्होंने महेश भट्ट से फिल्मों में कहानी लिखने की इच्छा जाहिर की। उनकी लेखन शैली को देख महेश भट्ट नें उन्हें मौका दिया। काफी लंबे समय तक वो महेश भट्ट के प्रोडक्शन के बैनर तले फिल्मों की कहानियां लिखती रहीं।

 

उन्होंने ‘आवारापन’, ‘राज 2’, ‘जिस्म 2’, ‘मर्डर 2’, ‘राज 3’ और ‘आशिकी 2’ जैसी कई बड़ी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी, जिससे उन्हें एक नई पहचान मिली। इस तरह फिल्मों की कहानी लिखने में उनकी रुचि बढ़ती चली गई। शगुफ्ता महेश भट्ट को अपना भाई मानती है।

 

 


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जिंदगी की विषम परिस्थितियों में हार मान जाने वालों को शगुफ्ता से सीख लेनी चाहिए। शगुफ्ता के लिए काटों भरे रास्तों पर चलकर इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था।

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